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Sunday, June 24, 2018

पंजाब केसरी में प्रकाशित वरिष्ठ पत्रकार योगेश कुमार गोयल की पुस्तक ‘दो टूक’ की समीक्षा


यह पुस्तक अमेजन पर बिक्री के लिए भी उपलब्ध है.
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आलेख रूपी मोतियों से सजी पुस्तक ‘दो टूक’


पुस्तक समीक्षा
आलेख रूपी मोतियों से सजी पुस्तक ‘दो टूक’

पुस्तक: दो टूक (निबंध संग्रह)

लेखक: योगेश कुमार गोयल

पृष्ठ संख्या: 112

प्रकाशक: मीडिया केयर नेटवर्क, 114, गली नं. 6, वेस्ट गोपाल नगर, नजफगढ़, नई दिल्ली-43.

कीमत: 150/- रु. मात्र



पिछले तीन दशकों से पत्रकारिता और साहित्य जगत में निरन्तर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक योगेश कुमार गोयल की चौथी पुस्तक है ‘दो टूक’, जिसमें उन्होंने कुछ सामयिक और सामाजिक मुद्दों की गहन पड़ताल की है तथा आम जनजीवन से जुड़े कुछ विषयों पर प्रकाश डाला है। हरियाणा साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित इस पुस्तक में लेखक ने पर्यावरण, धूम्रपान, प्रदूषण, बाल मजदूरी, श्रमिक समस्याओं तथा कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों को चित्रित किया है, वो भी चित्रों के साथ। निसंदेह पुस्तक के सभी लेख उपयोगी बन पड़े हैं, कहीं समाजोपयोगी, कहीं बाल-उपयोगी और कहीं साहित्य धरातल के करीब। लेखक को अपने विषय का गहन ज्ञान है और उन्होंने इस पुस्तक में इतनी सरल व सहज भाषा का उपयोग किया है ताकि आम पाठक भी आसानी से समझ सकें। तीन दशकों में योगेश गोयल ने ज्वलंत, ताजा मुद्दों तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर देशभर के विभिन्न समाचारपत्रों व पत्रिकाओं के लिए कई हजार लेख लिखे हैं और उनकी नशे के दुष्प्रभावों पर पहली पुस्तक वर्ष 1993 में प्रकाशित हुई थी, जो उन्होंने मात्र 19 वर्ष की आयु में लिखी थी, जिसके लिए उन्हें कई सम्मान भी प्राप्त हुए थे। उनकी समसामयिक मुद्दों पर बहुत अच्छी पकड़ हैं, यह बात उनके समीक्ष्य निबंध संग्रह में स्पष्ट परिलक्षित भी है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी योगेश गोयल नई दिल्ली स्थित मीडिया केयर नेटवर्क के सम्पादक हैं और रचना-धर्मी भी हैं, उनका यह निबंध संग्रह उनकी कड़ी तपस्या का फल है, जिसमें उन्होंने राजनीति, समाज और अन्य उपयोगी विषयों को लेकर इन रचनाओं की रचना की है।



इन दिनों पर्यावरणीय खतरों को लेकर हर कोई चिंतित है और पर्यावरणीय समस्या को लेकर इस पुस्तक के पहले ही निबंध ‘विकराल होती ग्लोबल वार्मिंग की समस्या’ में न केवल इस गंभीर समस्या पर प्रकाश डाला गया है बल्कि इसके कारण बताते हुए इस पर लगाम लगाने के उपाय भी बताए गए हैं। समाज की विभिन्न समस्याओं के साथ-साथ बच्चों की समस्याओं को लेकर भी लेखक जागरूक है, जो उनके इस निबंध संग्रह में सम्मिलित लेखों से स्पष्ट परिलक्षित है। धूम्रपान की भयावहता का उल्लेख करता निबंध ‘धुआं-धुआं होती जिंदगी’, बच्चों के लिए उपयोगी निबंध ‘बच्चे और बाल साहित्य’, ‘परीक्षा को न बनाएं हौव्वा’, आधुनिक जीवनशैली के कारण बच्चों में बढ़ते मोटापे पर ‘खतरे का सायरन बजाता आया मोटापा’, श्रमिकों तथा बाल मजदूरी की समस्या को उजागर करते लेख ‘कैसा मजदूर, कैसा दिवस’ और ‘श्रम की भट्टी में झुलसता बचपन’ के अलावा ‘वाहनों के ईंधन के उभरते सस्ते विकल्प’, ‘भूकम्प व विस्फोटों से नहीं ढ़हेंगी गगनचुंबी इमारतें’ इत्यादि। ‘ऐसे कैसे रुकेंगी रेल दुर्घटनाएं’ में लेखक ने रेलवे की त्रुटियों को उजागर करते हुए ऐसी दुर्घटनाओं से होने वाली जान-माल की हानि की ओर समाज का ध्यान आकृष्ट किया है और रेल दुर्घटनाएं रोकने के उपाय भी सुझाए हैं। ‘गौण होता रामलीलाओं का उद्देश्य’ में रामलीला के घटते आकर्षण व उसके कारणों की चर्चा की गई है। उपभोक्ता जागरूकता, मानवाधिकार संगठनों की संदिग्ध भूमिका, दीवाली पर बढ़ते प्रदूषण, एड्स की बीमारी जैसे विषयों पर भी विस्तृत लेख हैं। ‘आज के दमघौंटू माहौल में मूर्ख दिवस की प्रासंगिकता’, ‘कैसे हुई आधुनिक ओलम्पिक खेलों की शुरूआत?’, ‘दुनिया की नजरों में महान बना देता है नोबेल पुरस्कार’, ‘विश्व प्रसिद्ध हैं झज्जर की सुराहियां’ बारे दर्ज किए गए आलेख पाठकों की जानकारी बढ़ाते हैं। धरती के अलावा दूसरे ग्रहों पर भी जीवन की संभावनाओं को लेकर लोगों के मन में हमेशा ही जिज्ञासा बरकरार रही है और इसी जिज्ञासा को शांत करने के लिए इस विषय पर कुछ फिल्में भी बन चुकी हैं तथा कहानियां भी खूब लिखी गई हैं। ‘धरती से दूर जीवन की संभावना’ लेख पाठकों की इसी जिज्ञासा को शांत करने में काफी उपयोगी है।

कुल मिलाकर 20 भिन्न-भिन्न उपयोगी आलेख रूपी मोतियों से सजी यह पुस्तक बेहद उपयोगी व पठनीय है, जो अपने पाठकों के ज्ञान में उल्लेखनीय वृद्धि करती है। पुस्तक में लेखक ने न सिर्फ अपने विचार बल्कि तथ्य और आंकड़े भी शामिल किए हैं, जिससे पुस्तक की उपयोगिता काफी बढ़ गई है। ‘दो टूक’ पुस्तक में लेखक ने अपने विचारों को सही मायने में दो टूक रूप में ही प्रस्तुत किया है। आजकल सामयिक विषयों पर निबंध की पुस्तकें बहुत ही कम प्रकाशित हो रही हैं, ऐसे में मीडिया केयर नेटवर्क द्वारा प्रकाशित योगेश कुमार गोयल की यह पुस्तक एक सुखद प्रयास है, जो हर किसी के लिए बेहद उपयोगी व संग्रहणीय बन पड़ी है तथा किशोरों, युवाओं व अपना कैरियर संवारने में सचेष्ट छात्रों के लिए तो यह पुस्तक बहुत उपयोगी साबित हो सकती है। पेपरबैक संस्करण में प्रकाशित 112 पृष्ठों की इस पुस्तक का आवरण तथा मुद्रण बेहद आकर्षक हैं।
- श्वेता अग्रवाल

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तपती धरती और प्रकृति का बढ़ता प्रकोप


‘पंजाब केसरी’ के सम्पादकीय पृष्ठ पर
गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं को रेखांकित करता विशेष लेख
‘पंजाब करी’ के सम्पादकीय पृष्ठ पर गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं को रेखांकित करता विशेष लेख
‘पंजाब केसरी’ के सम्पादकीय पृष्ठ पर गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं को रेखांकित करता विशेष लेख
‘पंजाब केसरी’ के सम्पादकीय पृष्ठ पर गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं को रेखांकित करता विशेष लेख

Wednesday, June 13, 2018

शिमला की क्यों हुई ऐसी दुर्दशा?


राजस्थान के लोकप्रिय समाचारपत्र
‘दैनिक नवज्योति’
में 12.6.2018 को शिमला में गहराए भयानक जल संकट का
बेबाक विश्लेषण करता विशेष लेख

शिमला की अनदेखी से पर्यटन पानी-पानी


शिमला में गहराए जल संकट पर हिमाचल तथा पंजाब के कई स्थानों एवं चण्डीगढ़ से
प्रकाशित लोकप्रिय समाचारपत्र
‘दिव्य हिमाचल’
में 13.6.2018 को प्रकाशित विशेष लेख

Sunday, June 10, 2018

हर किसी के लिए उपयोगी व संग्रहणीय पुस्तक है ‘दो टूक’


पुस्तक समीक्षा


पुस्तक: दो टूक (निबंध संग्रह)
लेखक: योगेश कुमार गोयल
पृष्ठ संख्या: 112
प्रकाशक: मीडिया केयर नेटवर्क, 114, गली नं. 6, वेस्ट गोपाल नगर, नई दिल्ली-43.
कीमत: 150/- रु. मात्र




लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार योगेश कुमार गोयल बीते तीन दशक से अपने रचनाकर्म में लीन हैं। इस दौरान इन्होंने ज्वलंत व ताजा मुद्दों पर विभिन्न समाचारपत्रों व पत्रिकाओं के लिए हजारों लेख लिखे हैं। लेखक समसामयिक मुद्दों पर अच्छी पकड़ रखते हैं, यह बात समीक्ष्य निबंध संग्रह में भी स्पष्ट परिलक्षित है। इन दिनों उपन्यास, कहानी, कविता, लघुकथा, व्यक्तित्व विकास, व्यवहार आदि विषयों पर तो खूब लिखा जा रहा है लेकिन किशोरों, युवाओं व अपना कैरियर संवारने में सचेष्ट छात्रों के लिए सामयिक विषयों पर निबंध की बहुत ही कम पुस्तकें देखने में आ रही हैं। ऐसे में हरियाणा साहित्य अकादमी के सहयोग से प्रकाशित योगेश जी की प्रस्तुत पुस्तक इन छात्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
पुस्तक में विविध विषयों पर कुल 20 लेख हैं, जिनमें विभिन्न समस्याओं अथवा विषयों पर विशद विवेचना की गई है। लेखक ने न सिर्फ अपने विचार बल्कि तथ्य और आंकड़े भी शामिल किए हैं, जिससे पुस्तक की उपयोगिता काफी बढ़ गई है। ‘विकराल होती ग्लोबल वार्मिंग की समस्या’ में न सिर्फ इसके कारण बताए गए हैं बल्कि इस पर लगाम लगाने के उपाय भी बताए गए हैं। धूम्रपान पर लेख ‘धुआं धुआं होती जिंदगी’ में नशे के दुष्प्रभावों पर विस्तारपूर्वक चर्चा है, बाल मजदूरी पर लेख ‘श्रम की भट्ठी में झुलसता बचपन’ है, ‘बच्चे और बाल साहित्य’ में वर्तमान बाल साहित्य की कमियों को गिनाते हुए इसमें वांछित सुधारों पर भी चर्चा की गई है, ‘कैसा मजदूर, कैसा दिवस?’ में मजदूर दिवस की औपचारिकताओं और उपयोगिता पर सवालिया निशान खड़े किए गए हैं, ‘गौण होता रामलीलाओं का उद्देश्य’ में रामलीला के घटते आकर्षण व उसके कारणों की चर्चा की गई है। दीवाली के प्रदूषण, एड्स की बीमारी, उपभोक्ता जागरूकता, मानवाधिकार संगठनों की बनावटी भूमिका, रेल दुर्घटनाओं पर चिंता जैसे विषयों पर भी विस्तृत लेख हैं। हम अक्सर धरती के अलावा दूसरे ग्रहों पर भी जीवन की संभावनाएं तलाशते रहे हैं। इस पर फिल्में भी आ चुकी हैं और कहानियां भी खूब लिखी गई हैं। समीक्ष्य पुस्तक ‘दो टूक’ में लेख ‘धरती से दूर जीवन की संभावना’ बेहद उपयोगी व पठनीय है।
अन्य उपयोगी आलेखों में ‘वाहनों के ईंधन के उभरते सस्ते विकल्प’, ‘भूकम्प व विस्फोटों से नहीं ढ़हेंगी गगनचुंबी इमारतें’, ‘खतरे का सायरन बजाता आया मोटापा’, ‘परीक्षा को न बनाएं हौव्वा’, ‘आज के दमघौंटू माहौल में मूर्ख दिवस की प्रासंगिकता’, ‘कैसे हुई आधुनिक ओलम्पिक खेलों की शुरूआत?’, ‘दुनिया की नजरों में महान बना देता है नोबेल पुरस्कार’ जैसे जानकारीप्रद आलेख भी हैं। अंत में ‘विश्व प्रसिद्ध हैं झज्जर की सुराहियां’ एक रोचक लेख है। लेखक को इस सीरीज में अन्य निबंध संग्रह भी प्रकाशित करवाने चाहिएं। समीक्ष्य पुस्तक न सिर्फ पठनीय है बल्कि हर किसी के लिए उपयोगी व संग्रहणीय पुस्तक है। संदर्भ के लिए विद्यार्थियों के लिए यह एक अच्छा संकलन साबित होगा।
- शिखर चंद जैन
वरिष्ठ समीक्षक
कोलकाता

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भोपाल, ग्वालियर, गुना, आगरा तथा झांसी से प्रकाशित प्रतिष्ठित समाचारपत्र ‘स्वदेश’ में प्रकाशित पुस्तक ‘दो टूक’ की समीक्षा


यह पुस्तक अमेजन पर बिक्री के लिए भी उपलब्ध है.
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Saturday, June 09, 2018

प्रेस विज्ञप्ति

वरिष्ठ पत्रकार योगेश कुमार गोयल की पुस्तक ‘दो टूक’ का विमोचन




तीन दशकों से पत्रकारिता एवं साहित्य में सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार तथा मीडिया केयर नेटवर्क के सम्पादक योगेश कुमार गोयल की पुस्तक ‘दो टूक’ का विमोचन पंचकूला में एक मीडिया संस्थान द्वारा आयोजित संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जैन, हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह चैहान तथा हरियाणा यूनियन आॅफ जर्नलिस्ट के प्रदेशाध्यक्ष संजय राठी द्वारा किया गया। श्री गोयल की यह चैथी पुस्तक है, जिसमें विभिन्न समस्याओं अथवा विषयों पर विशद विवेचना की गई है। इससे पूर्व उनकी नशे के दुष्प्रभावों पर ‘मौत को खुला निमंत्रण’, जीव-जंतुओं संबंधी ‘जीव-जंतुओं की अनोखी दुनिया’ तथा सामयिक विषयों पर ‘तीखे तेवर’ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

श्री गोयल अभी तक देशभर के अनेक पत्र-पत्रिकाओं के लिए विभिन्न विषयों पर हजारों लेख लिख चुके हैं। उक्त समारोह में उन्हें पत्रकारिता में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जैन ने स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित भी किया। इस अवसर पर हरियाणा, चण्डीगढ़ तथा दिल्ली के अनेक पत्रकार व समाजसेवी उपस्थित थे।

शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में मेरी पुस्तक ‘दो टूक’ की समीक्षा


यह पुस्तक अमेजन पर बिक्री के लिए भी उपलब्ध है.
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Sunday, May 13, 2018

हर किसी के लिए उपयोगी व संग्रहणीय पुस्तक है ‘दो टूक’


पढ़ें कोलकाता से प्रकाशित प्रतिष्ठित समाचारपत्र ‘समाज्ञा’ में
वरिष्ठ समीक्षक श्री शिखर चंद जैन द्वारा लिखी मेरी पुस्तक ‘दो टूक’ की समीक्षा.

Tuesday, April 24, 2018

कर्नाटक में किसका पलड़ा कितना भारी?



‘पंजाब केसरी’ में कर्नाटक विधानसभा चुनाव पर आधारित विश्लेषणात्मक लेख

Wednesday, April 18, 2018

महाराष्ट्र में उभरेंगे नए सत्ता समीकरण


राजस्थान के प्रतिष्ठित समाचारपत्र ‘दैनिक नवज्योति’ में प्रकाशित लेख

Tuesday, April 17, 2018

क्या ऐसे ही बचेंगी बेटियां?


उन्नाव-कठुआ की दरिंदगी का सटीक विश्लेषण करता उत्तर भारत के प्रतिष्ठित समाचारपत्र ‘सवेरा टाइम्स’ में 17.4.2018 को प्रकाशित लेख

Sunday, April 15, 2018

आम आदमी और प्रभावशाली लोगों के लिए न्याय का अलग पैमाना क्यों?


उन्नाव और कठुआ के शर्मनाक मामलों का बेबाक विश्लेषण करता पश्चिम बंगाल के प्रतिष्ठित समाचारपत्र ‘समाज्ञा’ में 15.4.2018 को प्रकाशित लेख

सवालों के घेरे में 'आधार' की अनिवार्यता


प्रतिष्ठित समाचारपत्र ‘सच कहूं’ में 15.4.2018 को प्रकाशित लेख

हर चीज को आधार से क्यों जोड़ना चाहती है सरकार?


जयपुर से प्रकाशित प्रतिष्ठित समाचारपत्र ‘संजीवनी टुडे’ में 15.4.2018 को प्रकाशित लेख

हर चीज को आधार से क्यों जोड़ना चाहती है सरकार?


कोलकाता से प्रकाशित हिन्दी दैनिक ‘समाज्ञा’ में 13.4.2018 को प्रकाशित लेख

क्यों लुप्त हो रही है क्रिकेट से खेल भावना?

उत्तर भारत के प्रतिष्ठित समाचारपत्र ‘अजीत समाचार’ में 12 अप्रैल 2018 को प्रकाशित लेख

बैसाखी से जुड़े ऐतिहासिक तथ्य


उत्तर भारत के प्रतिष्ठित समाचारपत्र ‘अजीत समाचार’ में 14 अप्रैल 2018 को प्रकाशित लेख

Saturday, April 14, 2018

सवालों के घेरे में आधार की अनिवार्यता का बढ़ता दायरा


राजस्थान के एक बड़े अखबार ‘दैनिक नवज्योति’ में 12.4.2018 को प्रकाशित लेख

समय बहुमूल्य है, अतः एक-एक पल का सदुपयोग सार्थक कार्यों में करें.