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Saturday, December 28, 2013

पूर्व राज्यपाल ने दिया योगेश कुमार गोयल को ‘निष्पक्ष व नैतिक पत्रकारिता सम्मान’

‘मीडिया केयर नेटवर्क’ के समूह सम्पादक वरिष्ठ पत्रकार श्री योगेश कुमार गोयल को 22 दिसम्बर 2013 को ‘अखिल भारतीय स्वतंत्र लेखक मंच’ द्वारा वर्ष 2013 के ‘निष्पक्ष एवं नैतिक पत्रकारिता सम्मान’ से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान नई दिल्ली स्थित मुक्तधारा ऑडिटोरियम में आयोजित भव्य समारोह में सात राज्यों के पूर्व राज्यपाल व केन्द्रीय मंत्री महामहिम डा. भीष्म नारायण सिंह तथा दिल्ली के पूर्व महापौर महेश चंद शर्मा के कर कमलों द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर संस्था के राष्ट्रीय संयोजक रामानुज सिंह सुन्दरम् ने श्री गोयल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके लेखन की प्रशंसा की। मुख्य अतिथि महामहिम डा. भीष्म नारायण सिंह तथा पूर्व महापौर महेश चंद शर्मा ने सम्मान स्वरूप श्री गोयल को विशिष्ट प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, शॉल एवं माला प्रदान की।

उल्लेखनीय है कि श्री गोयल पिछले कई वर्षों से तीन प्रतिष्ठित फीचर एजेंसियों का संचालन एवं सम्पादन कर रहे हैं तथा पिछले ढ़ाई दशकों में देशभर के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में विभिन्न विषयों पर उनके अभी तक हजारों लेख प्रकाशित हो चुके हैं। उन्हें अब तक सरकारी व कई प्रतिष्ठित गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा दर्जनों सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उनकी अब तक तीन पुस्तकें ‘मौत को खुला निमंत्रण’, ‘जीव-जंतुओं की अनोखी दुनिया’ तथा ‘तीखे तेवर’ प्रकाशित हो चुकी हैं और ये तीनों ही पुस्तकें विभिन्न संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत की जा चुकी हैं। आकाशवाणी से भी उनकी अनेक विशेष वार्ताएं प्रसारित हो चुकी हैं।








घंटों पानी के बाहर भी रह सकती है ‘मडस्किपर’ मछली


‘अजीत समाचार’ में 28.12.13 को प्रकाशित

डायबिटीज का खतरा बढ़ाता है फास्ट फूड


Saturday, December 07, 2013

‘निष्पक्ष एवं नैतिक पत्रकारिता सम्मान’ के लिए चयनित हुए योगेश कुमार गोयल



वरिष्ठ पत्रकार श्री योगेश कुमार गोयल को ‘अखिल भारतीय स्वतंत्र लेखक मंच’ द्वारा वर्ष 2013 के ‘निष्पक्ष एवं नैतिक पत्रकारिता सम्मान’ के लिए चयनित किया गया है। उन्हें यह सम्मान संस्था द्वारा 22 दिसम्बर 2013 को गोल मार्किट, नई दिल्ली में मुक्तधारा ऑडिटोरियम में आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि श्री गोयल पिछले कई वर्षों से तीन प्रतिष्ठित फीचर एजेंसियों का संचालन एवं सम्पादन कर रहे हैं तथा पिछले ढ़ाई दशकों में देशभर के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में विभिन्न विषयों पर उनके अभी तक हजारों लेख प्रकाशित हो चुके हैं। उन्हें अब तक सरकारी व कई प्रतिष्ठित गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा दर्जनों सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उनकी अब तक तीन पुस्तकें ‘मौत को खुला निमंत्रण’, ‘जीव-जंतुओं की अनोखी दुनिया’ तथा ‘तीखे तेवर’ प्रकाशित हो चुकी हैं और ये तीनों ही पुस्तकें विभिन्न संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत की जा चुकी हैं। आकाशवाणी से भी उनकी अनेक विशेष वार्ताएं प्रसारित हो चुकी हैं।


ऋतिक-सलमान के साथ करीना का रोमांस


‘अजीत समाचार’ में 6.12.13 को प्रकाशित

Sunday, December 01, 2013

Sunday, October 20, 2013

पहले से ज्यादा परिपक्व हो गई हैं दीया मिर्जा



‘मीडिया केयर नेटवर्क’ द्वारा ‘लोकमत समाचार’ में 19.10.13 को प्रकाशित

Saturday, October 19, 2013

अब रबर भी होगी ‘पर्यावरण मित्र’


‘मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स’ द्वारा 17.10.13 को ‘दैनिक सन्मार्ग’ में प्रकाशित

इन्हें भी आजमाकर देखें


‘मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स’ द्वारा 18.10.13 को ‘पंजाब केसरी’ में प्रकाशित

Thursday, October 10, 2013

अगर बचना चाहें गंजेपन से


‘मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स’ द्वारा 10.10.13 को ‘पंजाब केसरी’ (जालंधर) में प्रकाशित

Saturday, September 21, 2013

धर्म की आड़ में आस्था और विश्वास से छल करते ‘बाबा’


-- योगेश कुमार गोयल --



लगातार 11 दिनों तक देश की कानून व्यवस्था का एक प्रकार से मखौल उड़ाने के बाद तथाकथित ‘संत’ आसाराम बापू आखिरकार कानून के शिकंजे में फंस ही गए। 11 दिनों तक चली उनकी नौटंकी के बाद अंततः आसाराम को गिरफ्तार करने में पुलिस कामयाब हुई। म.प्र. में आसाराम के ही छिंदवाडा आश्रम की नाबालिग लड़की को राजस्थान के जोधपुर स्थित आश्रम में कथित तौर पर हवस का शिकार बनाने के मामले के तूल पकड़ने के बाद चली आसाराम की नौटंकी, बदजुबानी और एक के बाद एक खुलती उनकी कलई ने उन्हें एक झटके में ईश्वर से शैतान का दर्जा दिला दिया।
वैसे आसाराम पर ऐसे आरोप कोई पहली बार नहीं लगे किन्तु उन पर अक्सर लगते ऐसे आरोपों के खिलाफ कार्रवाई करने की कभी किसी ने कोशिश ही नहीं की, जिसके लिए काफी हद तक हमारी राजनीतिक व्यवस्था को दोषी माना जा सकता है। हैरानी तो तब होती है, जब अनेक मौकों पर गंभीर आरोपों से घिरे होने के बावजूद अंधश्रद्धा से त्रस्त लाखों-करोड़ों लोगों ने इस विवादित संत को हमेशा अपनी सिर-आंखों पर बिठाया।
भारतीय संस्कृति में एक अच्छे और सच्चे संत का दर्जा उसी को दिया जाता है, जो मोह-माया के बंधन से मुक्त होकर सादा जीवन व्यतीत करता हो लेकिन आज के ये तथाकथित संत कितना सादा जीवन व्यतीत करते हैं और मोह-माया के बंधन से कितने परे हैं, यह आईने की तरह साफ है। दरअसल धर्म आज इतना बड़ा बिजनेस बन गया है कि धर्म का आवरण ओढ़कर आज कोई भी स्वयंभू संत बनकर हजारों एकड़ जमीन और बेशुमार सम्पत्ति का मालिक बन जाता है और राजनीतिक तंत्र के साथ-साथ लाखों-करोड़ों लोग पागलों की भांति उसके सामने शीश नवाने लगते हैं। हमारे समाज में आसाराम जैसे ही न जाने कितने संत भरे पड़े हैं, जो धर्म के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाकर न केवल अपनी दुकानें चमका रहे हैं बल्कि अनेक किस्म के अनैतिक कृत्यों में भी लिप्त हैं। समय-समय पर ऐसे तथाकथित संतों की कलई खुलती भी रही है किन्तु आम जनमानस की आंखों पर अंधश्रद्धा की पट्टी इस कदर बंधी रहती हैं कि बार-बार सामने आते ऐसे मामलों के बावजूद लोग ऐसे संतों या बाबाओं के मोहपाश में बड़ी आसानी से फंस जाते हैं। अक्सर मीडिया के सामने स्वयं को भगवान बताने, अपने लुभावने व भ्रामक विज्ञापनों से लोगों को आकर्षित करने और आस्था की आड़ में अपनी वाकपटुता से लोगों पर ऐसी छाप छोड़ने में इन तथाकथित संतों या बाबाओं को ऐसी महारत हासिल होती है कि एक आम आदमी इन्हें ही अपना सब कुछ मानकर अपना सर्वस्व इन पर न्यौछावर करने को तत्पर हो जाता है।
यहां अहम सवाल यह है कि आखिर ऐसे कौनसे कारण हैं कि आम आदमी बड़ी आसानी से आस्था के इन सौदागरों के हत्थे चढ़ रहा है? दरअसल देश की कमजोर प्रशासन प्रणाली, भ्रष्टाचार, महंगाई और आपराधों ने इस कदर जकड़ लिया है कि आज हर कोई खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। हर किसी का विश्वास अब मौजूदा राज्यतंत्र और राजनेताओं से पूरी तरह से विखंडित हो चुका है। ऐसे में स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहा आम आदमी खुद को जहां भी सुरक्षित महसूस करता है, बड़ी सहजता से उसी ओर अग्रसर हो जाता है और इसी ताक में बैठे रहते हैं ये आस्था के व्यापारी, जो भक्ति, विश्वास और लोगों के कल्याण के नाम पर अपना उल्लू सीधा करते हैं। यही कारण है कि बेबस आम आदमी इन पाखंडियों बाबाओं, संतों, साधुओं या बापुओं के शिकंजे में आसानी से फंस जाता है।
कुछ समय पहले एक ऐसे ही ‘संत’ को पुलिस ने धर-दबोचा था, जिसके पास दूर-दूर से श्रद्धालु प्रवचन सुनने के लिए आया करते थे और जिसके ‘भक्तों’ में कई बड़ी पहुंच वाले और बहुत पैसे वाले लोग भी शामिल थे किन्तु इस ‘संत’ की गिरफ्तारी के बाद यह सनसनीखेज खुलासा भी हुआ था कि अपने पैसे वाले भक्तों को वह उनसे मोटी रकम ऐंठकर रंगरलियां मनाने के लिए उनके पास खूबसूरत हसीनाएं भेजा करता था। कहने को तो वह भले ही एक ‘साधु’ था किन्तु वास्तव में वह कितना बड़ा शैतान था, इसका अनुमान इसी से ही लगाया जा सकता है कि पैसे वालों को परोसने के लिए उसने 16 से 30 वर्ष की उम्र की करीब 500 खूबसूरत कमसिन हसीनाओं को अपने जाल में फांस रखा था।
समय-समय पर ऐसे ही न जाने कितने ही ऐसे साधु-सन्यासियों, बाबाओं का भण्डाफोड़ होता ही रहता है लेकिन फिर भी हैरानी की बात यह है कि ऐसे लोगों की सारी पोल-पट्टी खुलने के बाद भी लोगों का ऐसे बाबाओं पर विश्वास कम होने का नाम नहीं लेता।
‘रेशनेलिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया’ नामक संस्था ने कुछ वर्ष पूर्व ‘टोपी वाले बाबा’ नाम से विख्यात एक ठग का भंडाफोड़ किया था, जिसने अम्बाला की पुलिस लाइन में स्थित राधाकृष्ण मंदिर से अपना कारनामा शुरू किया था। उसने जनपद के ‘टागरी पार’ रामपुर सरसेहड़ी रोड़ पर अपना मठ बनाया था और उसके पास अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लोग उ.प्र., पंजाब, हरियाणा व दिल्ली के दूरस्थ स्थानों से भी आने लगे थे। इस बाबा से मिलने के लिए ही न्यूनतम फीस 70 रुपये निर्धारित थी। पुलिस में मुंशी रहे इस व्यक्ति को न सिर्फ नौकरी से हाथ धोना पड़ा था बल्कि कुछ वर्ष के लिए जेल की सजा तथा तीस हजार रुपये जुर्माना भी भरना पड़ा था। यही नहीं, इस तथाकथित बाबा पर लड़कियों की खरीद-फरोख्त, दहेज, नारी उत्पीड़न आदि मामलों में भी मुकद्दमे चल रहे हैं। बावजूद इसके ऐसे ‘बाबा’ जनता को गुमराह कर खुद ‘ईश्वर’ बनने की ओर आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि ‘ड्रग्स एवं मैजिक रेमेडी एक्ट 1954’ की धारा 21 के तहत तंत्र-मंत्र, भभूति द्वारा किसी भी समस्या के हल या रोग निदान की बात गैर कानूनी है, फिर भी यह आश्चर्य की ही बात है कि ऐसे तमाम अपराधी निरन्तर फल-फूल रहे हैं।
आज देशभर में हमारे सैंकड़ों तथाकथित ‘भगवत अवतारी सद्गुरू’ या ‘महासंत’ हमें भगवान का दर्शन कराने व मोक्ष दिलाने में तो लगे हैं पर रोटी बगैर हम मर जाएं, उन्हें इससे कोई मतलब नहीं। वे हमें ‘राम’ देंगे, ‘भगवान’ देंगे। ‘यदा यदा हि धर्मस्य ...’ तथा ‘गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु’ को आधार बनाकर ये हमारे ‘स्वामी’ बनते हैं। ‘काम कांचन’ को जनता के लिए ‘मारक’ साबित करके इसे खुद के लिए ‘तारक’ बनाते हैं किन्तु ‘महासंत’ होने और ‘ईश्वर’ का दर्शन कराने का दावा करने के बावजूद स्वयं मोह-माया के बंधन में बुरी तरह जकड़े रहते हैं और अनैतिक कृत्यों में लिप्त रहते हैं।
जनता को हमेशा ‘एकता’ का संदेश देने वाले ये ‘संत’ सदैव एक-दूसरे का विरोध करते नजर आते हैं। तमाम झूठे दृष्टांतों के जरिये जनता को फांसने की कोशिश में लगे रहते हैं। आये दिन इनके यहां शिष्याओं के यौन शोषण या उनके गायब होने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। देखा जाए तो इनकी चल-अचल सम्पत्ति अरबों-खरबों में होती है। पैसे की पावर व राजनीतिक कृपादृष्टि के चलते कानून भी अक्सर इनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता। हां, जनता जरूर बिगाड़ सकती है पर जनता तो बेचारी खुद ...!
देश में मुट्ठी भर अभिजात्य वर्ग की अमीरी का पहाड़ ऊंचा होता जा रहा है और शेष पूरे भारत में गरीबी की खाई और गहरी होती जा रही है। लोगों के सामने रोटी, कपड़ा और मकान तथा दवा-दारू की जटिल समस्या आज भी है। माताएं अपना जिस्म, अपनी संतानें तक बेचती हैं। ‘असुरक्षा’ अहम समस्या हो गई है। आतंक-उग्रवाद कब किसकी जिंदगी छीन ले, कुछ पता नहीं लेकिन इन तमाम जटिल समस्याओं पर क्या कभी किसी भी प्रवचनकारी की जुबान खुलती है? रिश्वत आज ‘राष्ट्रधर्म’ बन रहा है। न्यस्थ स्वार्थ के लिए देश का हरसंभव अहित नेतृत्वकर्ता कर रहे हैं। देश पर विदेशी कम्पनियों के शिकंजे कस रहे हैं मगर आज के हमारे इन तथाकथित भगवत अवतारी सद्गुरूओं या संतों में न तो गुरू नानक देव या समर्थ गुरू रामदास जैसा साहस है और न ही स्वामी दयानन्द सरस्वती अथवा विवेकानन्द जैसा जज्बा।
‘नर पूजा-नारायण पूजा’ एवं ‘संहार नहीं, श्रृंगार करो’ को आधार बनाकर छल करते कथित संत-महात्माओं का सच आज सभी के सामने है। पलायनवादी दूषित मनोवृत्ति वाले ये साधु-साध्वियां जनता को डरपोक, कायर व जुर्म सहने वाली बना रहे हैं। परिवार, समाज, राष्ट्र, विश्व आज कितनी ही विकट समस्याओं की विभीषिका में जल रहे हैं और इन कथित संत-महात्माओं के चक्कर में पड़कर हम ‘जो कुछ हो रहा है, अच्छा हो रहा है, भगवान की यही मर्जी है’ मानकर अपने दरवाजे बंद किए स्वयं को बेहतर महसूस कर रहे हैं। प्रवचनकर्ता जीवन के यथार्थ से आंखें बंद किए बोलते हैं और श्रोता आंख-कान बंद किए उसे ग्रहण करने का नाटक करते हैं। उन्हें चढ़ावा मिलता है, उनकी वासना तृप्त होती है, बाकी कुछ नहीं होता। (एम सी एन)
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं तीन फीचर एजेंसियों के समूह ‘मीडिया केयर ग्रुप’ के प्रधान सम्पादक हैं)

Sunday, September 15, 2013

वृक्ष लगाएं, पर्यावरण बचाएं.


कम से कम एक वृक्ष आप भी लगाएं या लगवाएं और पर्यावरण संरक्षण में अपना अमूल्य योगदान दें.

Wednesday, August 28, 2013

यूपी के सपा नेता कॉल गर्ल्स के साथ मस्ती करते गिरफ्तार




उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार के दो बड़े नेता अलग-अलग स्थानों पर कॉल गर्ल्स के साथ रंगरलियां मनाते गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें एक हैं सपा नेता जितेन्द्र कुमार और दूसरे हैं सपा विधायक महेन्द्र सिंह.

बता दें कि जितेन्द्र कुमार को मुजफ्फरनगर की थाना सिविल लाइन पुलिस ने महावीर चौक स्थित रेड कॉरपोरेट होटल पर संयुक्त रूप से छापामारी कार्रवाई करते हुए वहां से रंगरलियां मनाते गिरफ्तार किया है जबकि उत्तर प्रदेश के सीतापुर इलाके से समाजवादी पार्टी के विधायक महेंद्र सिंह को गोवा के एक होटल में 6 कॉल गर्ल्स के साथ रगंरलियां मनाते गिरफ्तार किया गया है. इन विधायक महोदय पर तो इससे पहले भी दबंगई व हत्या के कई मामले चल रहे हैं


ऐसे में यह सवाल उठना क्या स्वाभाविक नहीं है कि क्या यही है मुलायम सिंह यादव या अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी का असली समाजवादी चेहरा?

Tuesday, August 13, 2013

‘महाप्रलय’ का संकेत तो नहीं मौसम का बिगड़ता मिजाज?


‘अजीत समाचार’ में प्रकाशित वरिष्ठ पत्रकार योगेश कुमार गोयल का विशेष स्तंभ

Saturday, July 13, 2013

सच में होता है दिल टूटने पर दर्द


कितना घातक है अंधाधुंध दवाओं का सेवन?


मानव उपस्थिति का पता कैसे लगा लेते हैं मच्छर?


कुछ दिलचस्प नजारे







सभी छायाचित्र पंजाब केसरी से साभार

अनोखे जीव-जंतु


‘मीडिया केयर नेटवर्क’ द्वारा दैनिक सन्मार्ग में 11.7.13 को प्रकाशित

फास्ट फूड का सेवन कितना हानिकारक?


‘मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स’ द्वारा ‘पंजाब केसरी’ (जालंधर) में प्रकाशित

जब हवा भी हुई रोमांटिक


बॉलीवुड हो या हॉलीवुड, फिल्म और ग्लैमर जगत से जुड़ी हसीनाएं, विभिन्न फंक्शंस में प्रायः ऐसी सैक्सी पोशाक पहनना पसंद करती हैं, जिन्हें लेकर कई बार वे स्वयं शर्मसार हो उठती हैं. पेश हैं ऐसे ही कुछ दिलचस्प नजारे:-




सभी चित्र पंजाब केसरी से साभार

Sunday, June 30, 2013

कितना उपयोगी है एक्यूपंक्चर?


डिप्रैशन: कारण, लक्षण एवं निदान


अनोखे जीव-जंतु


‘मीडिया केयर नेटवर्क’ द्वारा दैनिक सन्मार्ग में 13.6.13 को प्रकाशित

क्या है पार्किन्सन?


‘मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स’ द्वारा दैनिक सन्मार्ग में 7.6.13 को प्रकाशित

क्या है ‘वर्चुअल रियलिटी सूट’?


‘मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स’ द्वारा दैनिक सन्मार्ग में 30.5.13 को प्रकाशित

जब रहस्मय द्वीप में भटक गया जहाज


‘मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स’ द्वारा दैनिक सन्मार्ग में 1.6.13 को प्रकाशित

समय बहुमूल्य है, अतः एक-एक पल का सदुपयोग सार्थक कार्यों में करें.