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अभी तक यहां आए पाठक

Monday, November 29, 2010

अपने बच्चों को कैंसरकारक एजेंट्स से बचाएं


दैनिक पंजाब केसरी (जालंधर, लुधियाना, जम्मू, पालमपुर,
अम्बाला इत्यादि संस्करणों) में 29.11.2010 को प्रकाशित

बंदरों की पार्टी


जी नहीं, यह किसी विवाह समारोह अथवा किसी पार्टी के लिए सजाए गए फलों के स्टॉल का दृश्य नहीं है बल्कि यह दावत वास्तव में बंदरों के लिए ही दी गई है। यह दृश्य है थाईलैंड के लोपबुरी क्षेत्र में एक प्राचीन मंदिर के बाहर आयोजित विशेष वार्षिक वानर भोज का। थाईलैंड के इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बंदरों के लिए यह समारोह प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है और इस विशेष समारोह में बंदरों के लिए 4000 किलोग्राम से भी अधिक फल एवं सब्जियां परोसी जाती हैं, वो भी बाकायदा इंसानों के किसी खास उत्सव की भांति पूरी साज-सज्जा के साथ।

प्रस्तुति: मीडिया केयर ग्रुप ब्यूरो

Saturday, November 27, 2010

पंखों वाली गाय !


यह दृश्य देखकर चौंक गए न आप!

आपका चौंकना स्वाभाविक ही है क्योंकि अभी तक आपने किसी गाय के शरीर पर इतने बड़े-बड़े पंख कभी देखे नहीं होंगे। जी नहीं, यह जादुई कथानक हैरी पॉटर की फिल्मों वाली पंखों वाली कोई जादुई गाय नहीं है बल्कि यह एक साधारण गाय है।

साधारण गाय और वो भी पंखों वाली! बात कुछ हजम नहीं हुई न!
तो चलिए सस्पैंस खत्म करते हुए आपको बता ही दें कि इस चित्र में दिखाई दे रही गाय के शरीर पर कोई पंख नहीं उगे हैं बल्कि बड़े-बड़े जो पंख दिखाई दे रहे हैं, वे विश्व के सबसे बड़े पक्षी ‘सारस’ के हैं, जो इस गाय का पीछा कर रहा है। इस चित्र को जरा ध्यान से देखें, एक सारस इस गाय का पीछा करता नजर आएगा।

इस अद्भुत दृश्य को एक फोटोग्राफर ने कोएलाडियो नेशनल पार्क में अपने कैमरे में कैद किया।

प्रस्तुति : मीडिया केयर ग्रुप ब्यूरो

Monday, November 22, 2010

रक्त चूसने वाला छोटा परजीवी ‘पिस्सू’

कृत्रिम यात्री के साथ लीजिए ड्राइविंग का मजा

हैल्थ अपडेट


कोलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित करती है हल्दी

हल्दी न सिर्फ भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक मसाला है बल्कि यह कई बीमारियों में भी बहुत फायदेमंद है। हल्दी शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा को भी नियंत्रित करती है। हृदय की कई बीमारियों में भी यह बहुत असरकारक भूमिका निभाती है। चिकित्सा विज्ञानी डा. कृष्णा गोस्वामी के अनुसार हल्दी की अल्प मात्रा भी शरीर को कई रोगों से निजात दिला सकती है। डा. कृष्णा गोस्वामी बताती हैं कि हल्दी की मात्र एक ग्राम मात्रा भी व्यक्ति में कोलेस्ट्रोल से पैदा होने वाली जटिलताओं से मुक्ति दिला सकती है। यही नहीं, हल्दी शरीर के किसी भी अंग में ट्यूमर नहीं पनपने देने में भी बहुत अच्छी भूमिका निभाती है। (मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स)

अवसाद (डिप्रैशन) क्या है?

अवसाद दिमागी बीमारी की सबसे सामान्य स्थिति है। एक अवसादग्रस्त व्यक्ति में गहरी उदासी तथा अनिच्छुकता की भावनाएं होती हैं। उसमें बहुत कम इच्छाशक्ति होती है। अवसाद वाले व्यक्ति आमतौर पर न तो सही ढ़ंग से खाना खा पाते हैं, न ही पर्याप्त नींद ले पाते हैं और न सही तरीके से अपना कार्य कर पाते हैं। बहुत से लोग, जो अवसाद के शिकार होते हैं, उन्हें एंटीडिप्रेसेंट दवाओं तथा काउंसलिंग से सहायता दी जा सकती है। (मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स)

बच्चों के प्राथमिक दांत टूट जाएं तो क्या करें?

यदि बच्चे के प्राथमिक दांत (दूध के दांत) किसी दुर्घटनावश टूट जाएं तो उनके टूटने से उभरा खाली स्थान नया दांत निकलने से पहले ही अपने आप भर जाता है लेकिन ऐसा नहीं होने देना चाहिए बल्कि किसी दुर्घटना में प्र्राथमिक दांत टूटने पर खाली होने वाले स्थान को सुरक्षित रखने के लिए स्पेस मैटेनर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए ताकि उस स्थान पर स्थायी दांत आसानी से निकल सकें। स्पेस मैटेनर प्रायः प्लास्टिक अथवा किसी धातु से बनाया जाता है। यह आने वाले नए दांत के लिए न केवल जगह सुरक्षित रखता है बल्कि जबड़े की अस्थि और मांसपेशियों को सामान्य रूप से विकसित होने में भी सहायता प्रदान करता है। (मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स)

जुओं से बचें

सिर में जुएं होने पर प्रतिदिन बारीक कंघी से बालों को साफ करना तो आवश्यक है ही लेकिन चूंकि लीकें (जुएं) बालों में इस कदर चिपकी रहती हैं कि अक्सर बारीक कंघी से भी सारी जुएं नहीं निकल पाती, इसलिए बालों में नियमित रूप से कंघी करने के साथ-साथ जुएं होने पर किसी अच्छी क्वालिटी के जूं-नाशक लोशन या तेल का प्रयोग करें। कई ऐसे शैम्पू भी बाजार में उपलब्ध हैं, जिनके इस्तेमाल से बालों में जुएं मर जाती हैं और आप चैन की सांस ले सकते हैं। (मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स)

बच्चों के बैडरूम को न बनाएं कम्प्यूटर रूम


-- योगेश कुमार गोयल --

विज्ञान एवं तकनीकी की इस दुनिया में सब कुछ बहुत तेजी से बदल रहा है। लोग कामकाज के पुराने तौर-तरीकों को छोड़कर रोज नई-नई तकनीकें अपना रहे हैं। कम्प्यूटर भी इन्हीं नवीनतम तकनीकों में से एक है। बड़े तो बड़े, बच्चे भी अपना अधिकांश समय अब खेलने-कूदने के बजाय कम्प्यूटर के सामने ही बिताने लगे हैं। अधिकांश बच्चों के माता-पिता अथवा अभिभावक भी चाहते हैं कि आज के प्रतिस्पर्द्धात्मक युग में उनके बच्चे बचपन से ही कम्प्यूटर सीखकर जीवन में सफलता की सीढ़ियां चढ़ें।

संभवतः यही वजह है कि बहुत से माता-पिता बच्चों के बैडरूम को ही उनके कम्प्यूटर रूम के रूप में तब्दील कर देते हैं लेकिन ऐसा करके वे बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं। एक ओर जहां बच्चों में कम्प्यूटर एवं इंटरनेट की ओर तेजी से बढ़ते रूझान के कारण उनमें खेलने-कूदने के प्रति लगातार कम होती जा रही रूचि उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित होने लगी है, वहीं बहुत से बच्चे माता-पिता की अनुपस्थिति में कम्प्यूटर पर गेम आदि खेलने के बजाय इंटरनेट खोलकर अश्लील वेबसाइटों का भ्रमण करने लगते हैं। बहुत से बच्चे घरों के बजाय इंटरनेट कैफे में जाकर अश्लील वेबसाइटें खोलते हैं।

अक्सर यह देखा गया है कि माता-पिता की अनुपस्थिति में बच्चे अकेलेपन का फायदा उठाकर इंटरनेट खोलकर बैठ जाते हैं और अश्लील वेबसाइटों की सैर करने लगते हैं। इस तरह कई बार कम्प्यूटर बच्चों को कोई फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान पहुंचाने में ही भूमिका अदा करता है।

यू.के. में इसी सिलसिले में एक विस्तृत अध्ययन किया गया था और अध्ययन में पाया गया कि करीब 50 लाख किशोर घर से बाहर इंटरनेट केन्द्रों पर और वहां के कुल बच्चों की आबादी के करीब एक चौथाई बच्चे अपने घरों में ही अश्लील वेबसाइटें खोले हुए पाए गए।

इस संबंध में अमेरिका में एक सर्वेक्षण में पाया गया कि केवल एक ही महीने में 27.5 फीसदी नाबालिग बच्चों ने अश्लील वेबसाइटें खोली, जिनकी संख्या करीब 30 लाख है और इन बच्चों में से करीब आधी लड़कियां थी। दूसरी ओर बच्चों में काफी प्रचलित संगीत वेबसाइट को उस दौरान सिर्फ 8 लाख बच्चों ने ही देखा। उल्लेखनीय है कि इन 27.5 प्रतिशत बच्चों में से 21.1 प्रतिशत बच्चे 14 वर्ष अथवा उससे कम आयु के थे और इनमें से लड़कियों की संख्या 40.2 फीसदी थी। सर्वेक्षण में कहा गया है कि बच्चे गर्मी की छुट्टियों के दौरान इंटरनेट की अश्लील साइटें अधिक देखते हैं। सर्वेक्षण में यह भी देखा गया कि ये बच्चे इंटरनेट पर अपने कुल समय का करीब 65 फीसदी समय अश्लील साइटों पर ही गुजारते हैं।

‘इंटरनेट अपराध न्यायालय’ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस न्यायालय का उद्देश्य ऐसे साइबर स्पेस के विरूद्ध कार्रवाई करना है, जो वेब पर बच्चों का विश्वास जीत लेते हैं और उन्हें किसी न किसी तरह का प्रलोभन देकर उनका दुरूपयोग करते हैं। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विशेषकर 13 से 17 वर्ष आयु वर्ग की लड़कियों के लिए तो यह बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है क्योंकि अक्सर ऐसा देखा जाता है कि इंटरनेट के जरिये कुछ व्यक्ति कम उम्र की लड़कियों को तरह-तरह के प्रलोभन देकर उन्हें अपने जाल में फांस लेते हैं और उसके बाद शुरू होता है उन लड़कियों के शारीरिक शोषण का सिलसिला।

इसलिए अगर आप भी अपने बच्चों के बैडरूम में ही कम्प्यूटर रखने जा रहे हैं तो जरा सावधान हो जाइए। या तो आप अपने बच्चों के कमरे से कम्प्यूटर को हटा दीजिए या फिर कम्प्यूटर को इंटरनेट से मत जोड़िए। (मीडिया केयर नेटवर्क)

फूल ले लो फूल!

अद्भुत दृश्य

कास्टिंग काउच: फिल्म सितारों की नजर में

बॉलीवुड की खबरें

Thursday, November 18, 2010

युवाओं में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति: जिम्मेदार कौन?


‘मीडिया केयर नेटवर्क’ के डिस्पैच में प्रकाशित विशेष आलेख

तमाशा ‘रियलिटी शो’ का!


‘मीडिया केयर नेटवर्क’ के डिस्पैच में प्रकाशित विशेष आलेख

दुल्हन के लिए कुछ जरूरी बातें


‘मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स’ के
डिस्पैच में प्रकाशित विशेष लेख

मीडिया केयर नेटवर्क द्वारा प्रसारित विशेष लेख

‘मीडिया केयर नेटवर्क’ के डिस्पैच में प्रकाशित विशेष लेख

मदर टेरेसा के बारे में कुछ सनसनीखेज तथ्य

‘मीडिया केयर नेटवर्क’ के डिस्पैच में प्रकाशित विशेष लेख

तो जरूर करूंगी आइटम सांग: ईशा कोप्पीकर


पंजाब केसरी (जालंधर, लुधियाना, अम्बाला, पालमपुर, जम्मू
इत्यादि संस्करणों) में 18.11.2010 को प्रकाशित

(मीडिया केयर नेटवर्क के डिस्पैच में प्रसारित एवं प्रकाशित)

Wednesday, November 17, 2010

होम टिप्स


पंजाब केसरी (जालंधर, लुधियाना अम्बाला, पालमपुर, जम्मू
इत्यादि संस्करणों) में 17.11.2010 को प्रकाशित

(मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स द्वारा प्रसारित)

कमाल का नजारा

Friday, November 12, 2010

यदि दुर्घटनावश टूट जाएं बच्चे के दूध के दांत

‘मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स’ द्वारा प्रसारित एवं ‘पंजाब केसरी’ (जालंधर, लुधियाना, जम्मू, अम्बाला इत्यादि संस्करणों) में 11.11.2010 को प्रकाशित

ये है रबड़ जैसे शरीर वाली रूस की जिम्नास्ट ज्लाटा

Wednesday, November 03, 2010

शुभ दीपोत्सव


‘मीडिया केयर ग्रुप’ के सभी पाठकों को धन्वंतरि जयंती, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा तथा भैया दूज पर्व की हार्दिक मंगलकामनाएं.


 
पांच पर्वों का यह महोत्सव आपके जीवन की बगिया को खुशियों से महका दे, ईश्वर से यही कामना है.

चर्चित पुस्तक


अनूठा संग्रह है

‘जीव-जंतुओं की अनोखी दुनिया’

चर्चित पुस्तक: जीव-जंतुओं की अनोखी दुनिया

लेखक: योगेश कुमार गोयल

पृष्ठ संख्या: 96

प्रकाशन वर्ष: जुलाई, 2009

मूल्य: 100 रुपये

प्रकाशक: मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स, बादली, जिला झज्जर (हरियाणा)-124105.

कौनसे मेंढ़क से शराब निकलती है? कौनसे मुर्गे की पूंछ बीस फुट होती है? कौनसा बंदर हर पल रंग बदलता है? कौनसी चील आग में कूदकर शिकार पर झपटती है? दुनिया की सबसे कीमती मछली कौनसी है? कौनसा सांप घोंसला बनाता है? कौनसा जीव स्तनधारी होने पर भी अण्डे देता है? कौनसा पक्षी तूफान के दौरान भी उड़ सकता है? अपने बिल तक कैसे पहुंच जाती हैं चींटियां? मानव उपस्थिति का पता कैसे लगा पाते हैं मच्छर? कौनसे पक्षी रखते हैं संगीत की परख? कैसे बदलता है गिरगिट का रंग? कौनसी मछली हवा में उड़ती है? छह टांगें होने पर भी कौनसा जीव उड़ नहीं सकता? कौनसा चमगादड़ पशुओं का खून पीता है? दुनिया का सबसे बड़ा अजगर कौनसा है? दुनिया का सबसे विचित्र बाज कौनसा है? कौनसी बिल्ली ताड़ी पीती है? सबसे जहरीला बिच्छू कौनसा है? ... जैसे एक सौ चौंतीस जीव-जंतुओं पर आधारित पुस्तक ‘जीव-जंतुओं की अनोखी दुनिया’ अपने नाम को चरितार्थ करती है, जिसमें लेखक श्री योगेश कुमार गोयल ने जीव-जंतुओं की अनूठी प्रजातियों के बारे में सचित्र रोचक जानकारी प्रस्तुत की है।

‘हरियाणा साहित्य अकादमी’ की पुस्तक प्रकाशनार्थ सहायतानुदान योजना के अंतर्गत ‘बाल साहित्य’ श्रेणी में गत वर्ष अनुदानित उक्त कृति केे लेखक श्री गोयल राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में गत दो दशकों से प्रमुखता से प्रकाशित होने वाले लेखक हैं। विभिन्न समाचार एवं फीचर एजेंसियों के सम्पादक के तौर पर श्री गोयल बहुआयामी लेखन से जुड़े हैं। ‘जीव-जंतुओं की अनोखी दुनिया’ उनका एक रोचक संग्रह है, जिसमें दुर्लभ प्रजातियों के उन जीव-जंतुओं को शामिल किया गया है, जिनके क्रियाकलाप लीक से हटकर हैं। एक ओर संग्रह में ऐसी प्रजातियां भी हैं, जो विलुप्त हो चुकी हैं या विलुप्त होने के कगार पर हैं, वहीं दूसरी ओर उन अनूठे जीव-जंतुओं को भी इस श्रेणी में शामिल किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं।

पुस्तक में अधिकांश जीव-जंतु ऐसे हैं, जिन्हें देखना तो दूर, उनके बारे में सुना भी नहीं है, जिसके चलते हर पाठक वर्ग में ‘जीव-जंतुओं की अनोखी दुनिया’ के प्रति जिज्ञासा एवं कौतूहल पैदा होता है। संग्रह जीव-जंतुओं की विचित्र गतिविधियों की ज्ञानवर्द्धक जानकारी के अलावा इनकी विलुप्त होती प्रजातियों के संरक्षण का आव्हान भी करता है। यदि पुस्तक के अंदर के पृष्ठों पर भी आवरण की भांति श्वेत-श्याम के बजाय रंगीन छायाचित्र होते तो ‘जीव-जंतुओं की अनोखी दुनिया’ की वस्तुस्थिति और अधिक प्रभावी ढ़ंग से मुखरित हो पाती। लेखक का यह संग्रह अनूठे जीव-जंतुओं के बारे में संबंधित जानकारी देने में सफल रहा है। बच्चों के अलावा भी हर वर्ग को ‘जीव-जंतुओं की अनोखी दुनिया’ पसंद आएगी, ऐसी आशा है। (एम सी एन)

समीक्षक : सत्यवीर ‘नाहड़िया’

257, सेक्टर-1, रेवाड़ी (हरियाणा)

धन्वंतरि जयंती पर विशेष

(मीडिया केयर नेटवर्क के डिस्पैच में प्रकाशित)

समय बहुमूल्य है, अतः एक-एक पल का सदुपयोग सार्थक कार्यों में करें.