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Monday, November 22, 2010

बच्चों के बैडरूम को न बनाएं कम्प्यूटर रूम


-- योगेश कुमार गोयल --

विज्ञान एवं तकनीकी की इस दुनिया में सब कुछ बहुत तेजी से बदल रहा है। लोग कामकाज के पुराने तौर-तरीकों को छोड़कर रोज नई-नई तकनीकें अपना रहे हैं। कम्प्यूटर भी इन्हीं नवीनतम तकनीकों में से एक है। बड़े तो बड़े, बच्चे भी अपना अधिकांश समय अब खेलने-कूदने के बजाय कम्प्यूटर के सामने ही बिताने लगे हैं। अधिकांश बच्चों के माता-पिता अथवा अभिभावक भी चाहते हैं कि आज के प्रतिस्पर्द्धात्मक युग में उनके बच्चे बचपन से ही कम्प्यूटर सीखकर जीवन में सफलता की सीढ़ियां चढ़ें।

संभवतः यही वजह है कि बहुत से माता-पिता बच्चों के बैडरूम को ही उनके कम्प्यूटर रूम के रूप में तब्दील कर देते हैं लेकिन ऐसा करके वे बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं। एक ओर जहां बच्चों में कम्प्यूटर एवं इंटरनेट की ओर तेजी से बढ़ते रूझान के कारण उनमें खेलने-कूदने के प्रति लगातार कम होती जा रही रूचि उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित होने लगी है, वहीं बहुत से बच्चे माता-पिता की अनुपस्थिति में कम्प्यूटर पर गेम आदि खेलने के बजाय इंटरनेट खोलकर अश्लील वेबसाइटों का भ्रमण करने लगते हैं। बहुत से बच्चे घरों के बजाय इंटरनेट कैफे में जाकर अश्लील वेबसाइटें खोलते हैं।

अक्सर यह देखा गया है कि माता-पिता की अनुपस्थिति में बच्चे अकेलेपन का फायदा उठाकर इंटरनेट खोलकर बैठ जाते हैं और अश्लील वेबसाइटों की सैर करने लगते हैं। इस तरह कई बार कम्प्यूटर बच्चों को कोई फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान पहुंचाने में ही भूमिका अदा करता है।

यू.के. में इसी सिलसिले में एक विस्तृत अध्ययन किया गया था और अध्ययन में पाया गया कि करीब 50 लाख किशोर घर से बाहर इंटरनेट केन्द्रों पर और वहां के कुल बच्चों की आबादी के करीब एक चौथाई बच्चे अपने घरों में ही अश्लील वेबसाइटें खोले हुए पाए गए।

इस संबंध में अमेरिका में एक सर्वेक्षण में पाया गया कि केवल एक ही महीने में 27.5 फीसदी नाबालिग बच्चों ने अश्लील वेबसाइटें खोली, जिनकी संख्या करीब 30 लाख है और इन बच्चों में से करीब आधी लड़कियां थी। दूसरी ओर बच्चों में काफी प्रचलित संगीत वेबसाइट को उस दौरान सिर्फ 8 लाख बच्चों ने ही देखा। उल्लेखनीय है कि इन 27.5 प्रतिशत बच्चों में से 21.1 प्रतिशत बच्चे 14 वर्ष अथवा उससे कम आयु के थे और इनमें से लड़कियों की संख्या 40.2 फीसदी थी। सर्वेक्षण में कहा गया है कि बच्चे गर्मी की छुट्टियों के दौरान इंटरनेट की अश्लील साइटें अधिक देखते हैं। सर्वेक्षण में यह भी देखा गया कि ये बच्चे इंटरनेट पर अपने कुल समय का करीब 65 फीसदी समय अश्लील साइटों पर ही गुजारते हैं।

‘इंटरनेट अपराध न्यायालय’ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस न्यायालय का उद्देश्य ऐसे साइबर स्पेस के विरूद्ध कार्रवाई करना है, जो वेब पर बच्चों का विश्वास जीत लेते हैं और उन्हें किसी न किसी तरह का प्रलोभन देकर उनका दुरूपयोग करते हैं। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विशेषकर 13 से 17 वर्ष आयु वर्ग की लड़कियों के लिए तो यह बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है क्योंकि अक्सर ऐसा देखा जाता है कि इंटरनेट के जरिये कुछ व्यक्ति कम उम्र की लड़कियों को तरह-तरह के प्रलोभन देकर उन्हें अपने जाल में फांस लेते हैं और उसके बाद शुरू होता है उन लड़कियों के शारीरिक शोषण का सिलसिला।

इसलिए अगर आप भी अपने बच्चों के बैडरूम में ही कम्प्यूटर रखने जा रहे हैं तो जरा सावधान हो जाइए। या तो आप अपने बच्चों के कमरे से कम्प्यूटर को हटा दीजिए या फिर कम्प्यूटर को इंटरनेट से मत जोड़िए। (मीडिया केयर नेटवर्क)

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