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Monday, September 27, 2010

नागरिकों के अधिकार


व्यंग्य

नागरिकों के अधिकार
 
नेता जी चिल्लाए, ‘‘नागरिकों! तुम्हारे लिए अब तुम्हारे अधिकारों का उपयोग करने का वक्त आ गया है।’’

नागरिकों की भीड़ बोली, ‘‘करेंगे ... करेंगे!’’

‘‘तो कल हम नगर में चक्का जाम करेंगे।’’ नेता जी ने उकसाया।

नागरिकों ने प्रसन्न होकर जवाब दिया, ‘‘करेंगे ... करेंगे।’’

नेताजी ने दूसरा अधिकार याद दिलाया, ‘‘हम हड़ताल करेंगे।’’

नागरिकों ने फिर दोहराया, ‘‘करेंगे ... करेंगे।’’

नेताजी ने तीसरा अधिकार याद दिलाया, ‘‘जो हमसे टकराएगा ...!’’

नागरिकों ने जोश से जवाब दिया, ‘‘चूर चूर हो जाएगा।’’

और इस अधिकार को याद करते ही नागरिकों को अपने-अपने घर में रखी हॉकियां, तलवारें तथा वल्लम याद आ गए। किसी ने नहीं पूछा कि वे ऐसा क्यों करेंगे?

दरअसल हुआ यह था कि नेताजी के लड़के ने एक बड़े चोर की मोटरसाइकिल चुरा ली थी। बड़े चोर ने मय मोटरसाइकिल के उसे थाने में जमा कर दिया पर वह चोरी कबूलता ही नहीं था। बड़ा चोर थाने के आगे धरना देकर बैठ गया। उसने थानेदार से कहा, ‘‘मोटरसाइकिल चाहे तो वह ले ले पर चोरी कबूलना चाहिए। मैं दूसरी चुरा लूंगा।’’

छोटे चोर की हालत सांप और छछूंदर की तरह हो गई। वह मोटरसाइकिल छछूंदर की तरह उसके गले में अटक गई। वह यदि चोरी कबूलता है तो चोर काहे का? महात्मा गांधी हो जाएगा और यदि नहीं कबूलता तो थानेदार का तेल पिलाया हुआ ‘लाई डिटेक्टर’ अपना काम चालू कर देगा। सो उसने चोरी नहीं कबूली।

चोरी कबूलवाने के लिए थानेदार का लाई डिटेक्टर ज्यों ही हवा में उठा कि थाने का टेलीफोन घनघना उठा। दूसरी तरफ से एस. पी. साहब ने आदेश दिया, ‘‘थानेदार, अपना डंडा नीचे करो।’’

थानेदार को आश्चर्य हुआ कि पुलिस अधीक्षक महोदय को कैसे मालूम हुआ कि वह सच उगलवाने वाला है। उसे शक हुआ कि उसके डंडे में ही तो कहीं कोई खुफिया कैमरा नहीं छिपा हुआ!

बहरहाल, थानेदार ने अपना ‘लाई डिटेक्टर’ एकदम नीचे किया और फोन पर ही सेल्यूट मारते हुए कहा, ‘‘जी जनाब!’’

एस. पी. साहब ने कहा, ‘‘तुम्हारे दरवाजे पर देखो, मानव अधिकार आयोग बैठा हुआ है। चोर को किसी भी तरह समझा-बुझाकर चोरी कबूल करवाओ।’’ इतना कहकर उन्होंने टेलीफोन काट दिया।

थानेदार को पसीना आ गया। वह चोर से बोला, ‘‘देखो, चोरी करना पाप है। रावण ने चोरी की थी तो उसका पूरा परिवार नष्ट हो गया।’’

‘‘उसने मोटरसाइकिल नहीं चुराई थी’’, चोर बोला, ‘‘और मैंने किसी महिला का अपहरण नहीं किया है।’’

चोर समझ गया कि उसके पिताजी ने जिलाधीश को चक्का जाम करने का नोटिस दे दिया है। अब थाने में चोर शेर हो गया। चोर चोरी करके सीना जोरी करने लगा। वह ‘टॉम एंड जेरी’ के कार्टून का चूहा हो गया और थानेदार बिल्ली होकर कांपने लगा।

थानेदार फिर बोला, ‘‘देखो, महात्मा गांधी ने बचपन में चोरी की थी, फिर उसे कबूल किया था। तुम भी कबूल लो तो तुम्हें भी छोड़ दिया जाएगा।’’

चोर बोला, ‘‘मैंने भी बचपन में चोरी को कबूला था तो मेरे पिताजी ने मेरी पिटाई कर दी थी और हिदायत दी थी कि बेटा, चोरी करते रहना पर कबूलना कभी मत।’’

तब थानेदार ने एस. पी. साहब को फोन लगाया और कहा, ‘‘जनाब! चोर तो चोरी करना कबूलता ही नहीं!’’

एस. पी. साहब ने पूछा, ‘‘तुम्हारे थाने के पीछे दरवाजा है कि नहीं?’’

थानेदार ने जवाब दिया, ‘‘है जनाब! मैं पीछे के दरवाजे से ही थानेदार बना था!’’

‘‘तो अब पीछे के दरवाजे से चोर को बाहर कर दो।’’ उन्होंने आदेश दिया।

छोटा चोर बाहर आ गया और सीधा बड़े चोर के पास पहुंचा। उसने बड़े चोर के पैर छुये।

बड़े चोर ने पूछा, ‘‘अभी तुम अंदर ही हो न!’’

छोटे चोर ने जवाब दिया, ‘‘हां बड़े भाई, और अगर आप कहें तो चोरी करना भी कबूल लूं।’’

बड़ा चोर बोला, ‘‘नहीं, ऐसा मत करना। तुम्हारे बाप ने कल चक्का जाम की घोषणा की है। उनके पास जाओ और उनसे कहो कि तुम्हारे लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण का आवेदन दे दें।’’

दूसरे दिन नेता जी ने विश्वस्त किचन केबिनेट से कहा, ‘‘देखो बाजार के दोनों ओर चक्का जाम रहेगा और बीच में तुम लोग रहना। तुम लोग दुकानों से शालीनता से पेश आना, जिससे लूटते समय कोई नाजुक चीज टूटे नहीं। मेरे घर में वी.सी.पी. का प्रोजेक्टर और परदा नहीं है, वह मेरे घर में रख देना, इसी तरह 70 इंच का एल. सी. डी. शालीनतापूर्वक लूटना और बड़े चोर के घर रख देना। तुम लोग भी रेफ्रिजरेटर और 21 इंच का कूलर, टी.वी. ठेले में रखकर अपने-अपने घर ले जाना।’’ (एम सी एन)
 
-डा. कौशल किशोर श्रीवास्तव

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