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Sunday, April 04, 2010

जीव-जंतुओं की अनोखी दुनिया-45







. योगेश कुमार गोयल (मीडिया केयर नेटवर्क)
शिकार के पीछे कभी-कभार ही भागता है ‘रेसर’ सांप
रेसर जाति के अन्य सांपों की ही भांति यूं तो लाल पूंछ वाले रेसर सांप की गिनती तेजी से रेंगने वाले सांपों में ही की जाती है किन्तु फिर भी यह शिकार के पीछे कभी-कभार ही भागता है। अमूमन होता यही है कि जब इसे भूख लगती है तो यह अपनी जीभ को बाहर निकालकर लपलापाता है, जिससे इसे छिपकली या छोटे स्तनपायी प्राणियों की गंध सूंघने में मदद मिलती है। गंध मिलने के बाद यह शिकार के इंतजार में उस स्थान के आसपास बिल्कुल स्थिर अवस्था में खड़ा हो जाता है और जैसे ही कोई शिकार इसके नजदीक आता है, यह अपने जबड़े खोलकर अपने दांतों की सहायता से झट से शिकार को खींचकर पूरा का पूरा निगल जाता है। चमगादड़ रेसर सांप का पसंदीदा भोजन हैं, जिनकी तलाश में यह चमगादड़ों के निवास के आसपास वृक्षों की शाखाओं पर गोल व चिकने पत्थर की भांति लटकता रहता है। (एम सी एन)
अण्डे देने के लिए घोंसला बनाती है मादा किंग कोबरा
दुनियाभर में घोंसला बनाने वाला एकमात्र सांप है ‘किंग कोबरा’ यानी नागराज। मादा किंग कोबरा पत्ते और मिट्टी इकट्ठा कर-करके शंकु आकार का करीब एक फुट ऊंचा घोंसला बनाती है। मादा नाग यह घोंसला अपने अण्डे देने के लिए ही बनाती है। अपने इसी घोंसले में अण्डे देने के बाद मादा अपने अण्डे फूटकर उनसे बच्चे निकलने तक उसी के आसपास रहकर बड़ी मुस्तैदी से उसकी निगरानी करती है। अण्डे फूटने में करीब दो माह का समय लगता है और इस दौरान वह अधिकांशतः भूखी ही रहती है, जिसकी वजह से इन दो महीनों में मादा किंग कोबरा बहुत दुबली-पतली और कमजोर हो जाती है। जब अण्डे फूटने का समय आ पहुंचता है, तभी वह भोजन की तलाश में निकलती है। (एम सी एन)
सबसे भयानक सांप है थूकने वाला कोबरा
अत्यंत जहरीले माने वाले कोबरा सांपों में अफ्रीका में मिलने वाले ‘थूकने वाले कोबरा’ सबसे भयानक कोबरा माने जाते हैं। हालांकि समूचे अफ्रीका में कोबरा बड़ी संख्या में पाए जाते हैं और सभी बेहद जहरीले भी होते हैं किन्तु थूकने वाले कोबरा सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं। काले रंग के थूकने वाले कोबरा की लम्बाई पांच फुट तक हो सकती है। खतरा महसूस करने पर या इसे उत्तेजित करने पर यह अपना सिर ऊपर की ओर उठाकर अपना फन फैला लेते हैं और अपनी सुरक्षा का अचूक हथियार अपनाते हुए अचानक बड़ी फुर्ती से शत्रु की आंखों में अपने बेहद घातक और शक्तिशाली विष की दो बौछारें फैंक देते हैं। विष की यह बौछार कितनी खतरनाक हो सकती है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह विष की बौछार से 8 फुट की दूरी से भी अपने दुश्मन पर अचूक प्रहार करने में सक्षम होता है। इसका विष इसके विषदंत के किनारे पर स्थित दो छोटे से छिद्रों से निकलता है और यह विष इतना घातक होता है कि मात्र 1 ग्राम विष ही 160-170 व्यस्क व्यक्तियों को पलभर में ही मौत की नींद सुला देने के लिए पर्याप्त होता है। छोटे स्तनधारी, पक्षी, छिपकली, अण्डे इत्यादि थूकने वाले कोबरा का पसंदीदा भोजन हैं। (एम सी एन)

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