आपकी उपयोगी रचनाओं एवं टिप्पणियों का स्वागत है.

उपयोगी सूचना

हिन्दी भाषा के समाचारपत्र तथा पत्रिकाएं यदि अपने प्रकाशनों के लिए ‘मीडिया केयर नेटवर्क’, ‘मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स’ तथा ‘मीडिया केयर न्यूज’ की सेवाएं नियमित प्राप्त करना चाहें तो हमसे ई-मेल द्वारा सम्पर्क करें। आपके अनुरोध पर सेवा शुल्क संबंधी तथा अन्य अपेक्षित जानकारियां उपलब्ध करा दी जाएंगी।

हम इन फीचर एजेंसियों के डिस्पैच में निम्नलिखित विषयों पर रचनाएं प्रसारित करते हैं तथा डिस्पैच कोरियर अथवा ई-मेल द्वारा उपलब्ध कराए जाते हैं:-

राजनीतिक लेख, रिपोर्ट एवं विश्लेषणात्मक टिप्पणी, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय चर्चा, सामयिक लेख, फिल्म लेख एवं स्टार इंटरव्यू, फिल्म गॉसिप, ज्ञानवर्द्धक एवं मनोरंजक लेख, रहस्य-रोमांच, घर परिवार, स्वास्थ्य, महिला जगत, युवा जगत, व्यंग्य, कथा-कहानी, मनोरंजन, कैरियर , खेल, हैल्थ अपडेट, खोज खबर, महत्वपूर्ण दिवस, त्यौहारों अथवा अवसरों पर लेख, बाल कहानी, बाल उपयोगी रचनाएं, रोचक जानकारियां इत्यादि।

लेखक तथा पत्रकार विभिन्न विषयों पर अपनी उपयोगी अप्रकाशित रचनाएं प्रकाशनार्थ ई-मेल द्वारा भेज सकते हैं।
Share/Bookmark

अभी तक यहां आए पाठक

Monday, July 12, 2010

संकटग्रस्त वन्य प्राणी है ‘आसामीज बंदर’


भारत, भूटान, नेपाल, वियतनाम, थाईलैंड, दक्षिण चीन सहित दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के कई भागों में पाए जाने वाले आसामीज बंदर प्रायः सघन वनों में देखे जाते हैं। भारत में ये बंदर हिमालय के जंगलों में उत्तर प्रदेश से असम तक पाए जाते हैं। इनके शरीर का रंग भूरा होता है तथा इनका शरीर काफी गठीला होता है। इनके पीछे का हिस्सा लाल व नारंगी नहीं होता, इसलिए इन्हें अन्य बंदरों से अलग आसानी से पहचाना जा सकता है। सिर से पूंछ तक इनके शरीर की लम्बाई करीब 80 सेंटीमीटर तथा वजन 10 से 15 किलो के बीच होता है। मादा का वजन 8 से 12 किलो के बीच होता है। इनकी पूंछ की लम्बाई 25-30 सेंटीमीटर होती है। हिमालय में यह बंदर 810 से 1830 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। यह एक संकटग्रस्त वन्य प्राणी है। इसकी आदतेें विध्वंसक किस्म की होती हैं। फल, फूल, पत्तियां तथा कीड़े-मकोड़े इसका पसंदीदा आहार होते हैं। इसकी औसत आयु लगभग 20 वर्ष होती है। इसका प्रजनन काल वर्षभर रहता है और मादा छह माह के गर्भाधान के बाद एक बच्चे को जन्म देती है।

-- योगेश कुमार गोयल

No comments:

समय बहुमूल्य है, अतः एक-एक पल का सदुपयोग सार्थक कार्यों में करें.