क्यों अटकती है दिमाग के रिकार्ड ट्रैक पर कोई धुन?


कई बार ऐसा होता है कि चलते-फिरते सुनी गई कोई धुन पूरा दिन हमारे दिमाग में ‘अटकी’ रह जाती है। ऐसा क्यों होता है, अब तक यह एक पहेली ही था पर वैज्ञानिक अब इस पहेली को समझने के करीब आ गए हैं। वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क के उस भाग को खोज लिया है, जो संगीत को हमारे समझने लायक बनाता है। मस्तिष्क का यही भाग हमारी तार्किक शक्ति और जरूरत पड़ने पर हमारी स्मरण शक्ति (याद्दाश्त) का दरवाजा खोलने में भी सहायक होता है। वैज्ञानिकों ने इसके लिए ऐसे व्यक्तियों पर परीक्षण किया, जिन्हें संगीत की थोड़ी-बहुत समझ थी। उन व्यक्तियों को 8 मिनट की एक ऐसी धुन सुनाई गई, जिसमें सभी 24 मेजर और माइनर ‘की’ प्रयुक्त हुई थी। इस धुन में एक अन्य धुन इस प्रकार मिलाई गई थी, जो बीच-बीच में उभरती थी। यह धुन एक विशेष ‘आकार’ में तैयार की गई थी।

वैज्ञानिकों ने पाया कि उक्त सभी व्यक्तियों के मस्तिष्क का वह हिस्सा, जो माथे के ठीक पीछे स्थित होता है, उक्त धुन के ‘आकार’ की पहचान कर रहा था। इसके आधार पर वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया कि मस्तिष्क का उक्त हिस्सा, जो ‘रोस्ट्रोमाडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स’ कहलाता है, मस्तिष्क में संगीत का ‘नक्शा’ स्टोर करके रखता है और यही वह हिस्सा है, जो कहीं अधसुनी सी धुन को बार-बार हमें गुनगुनाने पर मजबूर करता है।
प्रस्तुति: योगेश कुमार गोयल

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