आपकी उपयोगी रचनाओं एवं टिप्पणियों का स्वागत है.

उपयोगी सूचना

हिन्दी भाषा के समाचारपत्र तथा पत्रिकाएं यदि अपने प्रकाशनों के लिए ‘मीडिया केयर नेटवर्क’, ‘मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स’ तथा ‘मीडिया केयर न्यूज’ की सेवाएं नियमित प्राप्त करना चाहें तो हमसे ई-मेल द्वारा सम्पर्क करें। आपके अनुरोध पर सेवा शुल्क संबंधी तथा अन्य अपेक्षित जानकारियां उपलब्ध करा दी जाएंगी।

हम इन फीचर एजेंसियों के डिस्पैच में निम्नलिखित विषयों पर रचनाएं प्रसारित करते हैं तथा डिस्पैच कोरियर अथवा ई-मेल द्वारा उपलब्ध कराए जाते हैं:-

राजनीतिक लेख, रिपोर्ट एवं विश्लेषणात्मक टिप्पणी, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय चर्चा, सामयिक लेख, फिल्म लेख एवं स्टार इंटरव्यू, फिल्म गॉसिप, ज्ञानवर्द्धक एवं मनोरंजक लेख, रहस्य-रोमांच, घर परिवार, स्वास्थ्य, महिला जगत, युवा जगत, व्यंग्य, कथा-कहानी, मनोरंजन, कैरियर , खेल, हैल्थ अपडेट, खोज खबर, महत्वपूर्ण दिवस, त्यौहारों अथवा अवसरों पर लेख, बाल कहानी, बाल उपयोगी रचनाएं, रोचक जानकारियां इत्यादि।

लेखक तथा पत्रकार विभिन्न विषयों पर अपनी उपयोगी अप्रकाशित रचनाएं प्रकाशनार्थ ई-मेल द्वारा भेज सकते हैं।
Share/Bookmark

अभी तक यहां आए पाठक

Monday, October 18, 2010

गूंगी-बहरी-अंधी मायावती सरकार के लिए

 

मेरी मां यूपी के गाजीपुर जिले के नंदगंज थाने में पूरी रात बंधक बनाकर रखी गईं. साथ में विकलांग चाची को भी रखा गया. चाची की बहू को भी. इन लोगों ने थाने के अंदर मीडियाकर्मियों को अपना बयान दिया. इसमें सब कुछ बताया. इसमें साफ-साफ बताया कि पुलिस ने घर में किसी पुरुष को न पाकर इन लोगों को जबरन गाड़ी में बिठा लिया. कई घंटे इधर-उधर घुमाने के बाद थाने में लाकर डाल दिया. ये यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि किस तरह उत्तर प्रदेश की पुलिस बेलगाम हो चुकी है और किसी परिवार के आत्मसम्मान और इज्जत कौ रौंदने पर आमादा है. क्या इन प्रमाणों के बाद भी यूपी सरकार को कोई सुबूत चाहिए? लेकिन मायावती सत्ता के मद में चूर हैं. मायावती सरकार गूंगी-बहरी और अंधी हो चुकी है. उनके अफसर बुद्धि और विवेक हीन प्यादों की तरह कुर्सियां पर आसीन हैं और जी सर जी सर करते हुए लोकतंत्र की आत्मा के साथ बलात्कार कर रहे हैं.
मेरी इस निजी लड़ाई, जिसे मैं खुद निजी नहीं मानता क्योंकि कल तक यह सब दूसरों के घरों में हुआ करता था, आज मेरे घर में हुआ है और परसों आपके भी घर में हो सकता है, में जो साथी अपना समर्थन और सहयोग दे रहे हैं, उनका मैं आभार व्यक्त करूंगा तो शायद यह औपचारिकता होगी और उनके सहयोग की तौहीन होगी. मेरी इच्छा इस मसले को आगे बढ़ाने की है ताकि दोषी पुलिसकर्मियों, पुलिस अधिकारियों और सत्ताधीशों को सजा मिल सके, सबक मिल सके. मुझे कुछ ऐसे लोग चाहिए जो इस मुद्दे को खुद के स्तर से उन सभी जगहों तक पहुंचा सकें जहां जहां न्याय देने-दिलाने के दावे किये जाते हैं. मैं वेब मीडिया और प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रानिक मीडिया के सभी साथियों से अनुरोध कर रहा हूं कि वे इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएं. खासकर लखनऊ व दिल्ली की मीडिया के साथी इस मुद्दे को एक अभियान के तौर पर लें, इसे प्रचारित-प्रसारित करें ताकि इस प्रकरण की आवाज हर कहीं पहुंचे और न्याय की इस मुहिम को गति मिल सके. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता, इसी कारण आप लोगों के साथ की दरकार है.

-- यशवंत
एडिटर, भड़ास4मीडिया

No comments:

समय बहुमूल्य है, अतः एक-एक पल का सदुपयोग सार्थक कार्यों में करें.