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Friday, December 24, 2010

विश्व सिनेमा और ईसा मसीह


प्रस्तुति: मीडिया केयर नेटवर्क ब्यूरो

प्रेम, दया और करूणा के सागर प्रभु ईसा मसीह के धर्मावलम्बी विश्व के हर देश में हैं। भारत में भी उनके अनुयायी बहुत बड़ी तादाद में हैं लेकिन इसके बावजूद यह एक विड़म्बना ही है कि ईसा मसीह और उनके महान् धर्मग्रंथ बाइबिल पर किसी भी देश में ज्यादा फिल्में नहीं बनी हैं। यदि हम सम्पूर्ण विश्व के फिल्म इतिहास का अवलोकन करें तो सबसे कम संख्या हमें इन ईसा विषयक फिल्मों की ही नजर आएगी। भारत में तो इन फिल्मों की संख्या लगभग नगण्य है ही, विश्व के जिन अत्यधिक सम्पन्न देशों ने सिने कला को जन्म दिया, जहां इस कला ने लगातार तकनीकी प्रगति की, वहां भी ईसा और बाइबिल पर बनी फिल्मों की संख्या उंगलियों पर गिनी जा सकती है। इन फिल्मों में भी ईसा मसीह या बाइबिल पर पूरी तरह कम फिल्में ही बनी हैं, अधिकांश फिल्में बाइबिल की कथाओं और उपकथाओं के आधार पर ही बनी हैं।


पूरी तरह ईसा और बाइबिल पर बनी पहली फिल्म संभवतः सन् 1897 में प्रदर्शित ‘पैशन डी जीसस क्राइस्ट’ थी। उसके बाद ‘लाइफ ऑफ क्राइस्ट’, ‘किंग ऑफ किंग्स’, ‘द ग्रेटेस्ट स्टोरी एवर टोल्ड’, ‘द बाइबिल’, ‘द बाइबिल इन द बिगिनिंग’ जैसी कुछ और फिल्में बनी। इन फिल्मों में प्रभु यीशु की जीवन कथा और उनके सारगर्भित उपदेश व बाइबिल की उत्पत्ति के कुछ अंशों को ईमानदारी के साथ दिखाने का पूरा पूरा प्रयास किया गया था। अपने इस प्रयास और उद्देश्य में ये फिल्में काफी हद तक सफल भी रही।

बाइबिल की कथाओं व उपकथाओं पर आधारित जो फिल्में बनी हैं, उनमें ‘एडम एंड ईव’, ‘सैमसन एंड डिलाइला’, ‘डेविड एंड बाथ शीबा’, ‘हैन्स क्रिश्चियन एंडरसन’, ‘जोसेफ एंड जि ब्रदरेन’, ‘यूलिसिस’, ‘द टेन कमांड मेंट्स’, ‘एलैक्जेंडर द ग्रेट’, ‘सोलोमन एंड शीबा’, ‘स्पाटकिस’, ‘सैमुअल बॉनस्टन के एल सिंड’, ‘बाराबस’, ‘क्लियोपेट्रा’ आदि प्रमुख हैं। इनमें ‘सैमसन एंड डिलाइला’ (1950) और ‘द टेन कमांड मेंट्स’ (1956) बेहतरीन फिल्में मानी जाती हैं। ‘सैमसन एंड डिलाइला’ ब्लॉक बस्टर फिल्मों के युग की शुरूआत करने वाली बाइबिल पर आधारित एक भव्य फिल्म थी। इस फिल्म के क्लाइमैक्स में पागन मंदिर के ध्वस्त करने के दृश्य लाजवाब थे। भारत में सर्वाधिक लोकप्रियता अर्जित करने वाली, दर्शकों को विदेशी फिल्मों की ओर आकृष्ट करने वाली, परदे पर सतरंगी छटा बिखेरकर आंखों को तृप्त करने वाली यह फिल्म कालजयी है।

‘सैमसन एंड डिलाइला’ के समान ही ‘द टेन कमांड मेट्स’ को भी दर्शकों ने बहुत पसंद किया। मोजेस की कहानी पर आधारित इस फिल्म में भगवान दहोवा द्वारा हजरत मूसा को दिए गए संदेशों का विवरण है। पत्थर पर संदेशों का अंकित होना और दहोवा के अनुयायियों के लिए समुद्र में रास्ता बन जाने के दृश्यों का फिल्मांकन फिल्म में काफी खूबसूरती से किया गया था। इसके अलावा कई छोटे-छोटे प्रसंग भी कलात्मक रूप से परदे पर अवतरित हुए।

ईसा मसीह के जीवन में प्रत्यक्ष संबंध रखने वाली अन्य फिल्मों में ‘ईस्टर एंड द किंग’, ‘जीसस ऑफ नजरेश’, ‘द सांता क्लॉस’ व ‘नाइट मेअर बिफोर क्रिसमस’ और प्रत्यक्ष संबंध रखने वाली फिल्मों में ‘द रोब’, ‘सलोमी’, ‘प्रांडिंगल’, ‘द सिल्वर शॉलिस’, ‘बेनहर’ आदि विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इनमें ‘बेनहर’ (1959) सर्वश्रेष्ठ फिल्म मानी जाती है। ‘बेनहर’ हॉलीवुड की सर्वाधिक प्रतिष्ठित पुरस्कृत व भव्य ब्लॉक बस्टर फिल्म है। मानवीय पहलुओं से ओत-प्रोत इस मर्मस्पर्शी फिल्म की कहानी का काफी बड़ा भाग ईसा के अंतिम दिनों पर आधारित था। फिल्म की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसमें प्रभु यीशु की भूमिका कर रहे पात्र का चेहरा एक दृश्य में भी नहीं दिखाया गया था, केवल उनकी मौजूदगी लोगों पर क्या असर छोड़ती है, इसका बड़ी कुशलता से चित्रण किया गया था। विश्व भर में इस फिल्म को करोड़ों दर्शकों ने बड़े चाव से बार-बार देखा। ‘बेनहर’ को पहली बार सर्वाधिक 11 ऑस्कर अवार्ड प्राप्त हुए थे, जो उस समय एक कीर्तिमान था।

ईसा या बाइबिल पर यद्यपि भारत में कोई हिन्दी फिल्म नहीं बनी है लेकिन तमिल, तेलुगू व अन्य दक्षिण भारतीय भाषाओं में जरूर कुछ प्रयास हुए हैं। यह कहना भी असंगत न होगा कि विषय पर बहुत ज्यादा पकड़ न होने के बावजूद ये प्रयास सराहनीय हैं। समूचे विश्व सिनेमा में ईसा मसीह और बाइबिल पर गंभीर, सार्थक व प्रभावपूर्ण फिल्मों की आवश्यकता अभी भी है। ऐसी फिल्में, जो न केवल प्रभु यीशु के विराट और सार्वभौमिक व्यक्तित्व को उभारें बल्कि उनके संदेशों को भी गहराई से अभिव्यक्त करें। आज के हिंसा, आतंकवाद व अशांति के दौर में ये ईसा विषयक फिल्में प्रेम और सौहार्द का कार्य कर सकती है। (एम सी एन)

(‘मीडिया केयर ग्रुप’ की विशेष प्रस्तुति)

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