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Sunday, December 05, 2010

सांप का श्राप

-- शिशु मानव (मीडिया केयर नेटवर्क) --




श्राप कभी बेअसर नहीं होता, देर-सवेर इसे भुगतना ही पड़ता है। मानव तो मानव, देवी-देवता और भगवान तक भी श्राप के प्रभाव से बच नहीं पाते। सर्प योनि के नाग-नागिन के श्राप के अनेक किस्से सुनने में आते रहे हैं। सांपों के श्राप को लेकर घटी कुछ सच्ची तो कुछ काल्पनिक कथाओं पर बॉलीवुड में कई फिल्में भी बन चुकी हैं। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में हाल ही में घटी ऐसी ही एक अजीबोगरीब घटना में सांप के श्राप का प्रभाव स्पष्ट देखा भी गया है। सोनभद्र जिले के दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के सुगवामान नामक गांव में इन दिनों एक ऐसे ही अजीबोगरीब वाकये को देख-सुनकर हर कोई हैरान है।

दरअसल हुआ यह कि इस गांव के एक किशोर ने जब से एक सांप को मारा है, तभी से वह स्वयं भी सांपों की तरह ही हरकतें करते हुए फुफकारने भी लगा है। हालांकि डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार यह किशोर पूरी तरह से सामान्य है लेकिन ओझा और तांत्रिक इसे सांप के श्राप का प्रभाव मान रहे हैं। उनका मानना है कि किशोर ने जिस सांप को मारा है, उसके श्राप से ही किशोर की यह दशा हुई है क्योंकि इस किशोर ने सांप से किया अपना वायदा पूरा नहीं किया था।

बताया जाता है कि सुगवामान गांव का आलोक पिछले दिनों अपने चार-पांच दोस्तों के साथ मवेशियों को चराने के लिए जंगल में गया था। उसी दौरान उन्हें वहां रास्ते में एक सांप दिखाई दिया। लकड़ी से मारने की कोशिश पर सांप डरकर एक बिल में घुस गया। आलोक के दोस्तों का कहना है कि उसी दौरान आलोक ने बिल के पास जाकर सांप से कहा कि अगर वह बिल से बाहर आ जाएगा तो वह उसे दूध-लावा खिलाएगा। हैरानी की बात यह कि कुछ ही पलों बाद सांप वास्तव से बिल से बाहर निकल आया और एक ओर भागने लगा लेकिन तभी आलोक ने उस पर आक्रमण कर दिया। तभी अचानक आलोक के साथ बिल्कुल अप्रत्याशित घटना घटी। सांप को मारने के लिए ऊपर उठा आलोक का हाथ ऊपर ही उठा रह गया। फिर अन्य दोस्तों ने मिलकर उस सांप को मार डाला।

सांप को मारने के बाद आलोक को उसके दोस्त अपने साथ घर ले आए लेकिन आलोक उसके बाद से लगातार अजीब-अजीब सी हरकतें करने लगा, जिसके बाद उसके परिजन उसे चैकअप के लिए अस्पताल ले गए। अस्पताल में तमाम डॉक्टरी जांच करने के बाद डॉक्टरों ने कहा कि आलोक पूरी तरह से सामान्य है। आलोक में किसी भी तरह की शारीरिक या मानसिक बीमारी के कोई लक्षण नहीं पाए गए। फिर भी आलोक फुफकारने के साथ ही सांपों की तरह ही लहराने और हाथ घुमाने जैसी हरकतें कर रहा है। फिलहाल गांव में इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है और डॉक्टरों द्वारा आलोक में किसी भी तरह की बीमारी के कोई लक्षण नहीं बताने पर ओझाओं ने आलोक को ‘सांप के श्राप’ से मुक्ति दिलाने की कवायदें शुरू कर दी हैं। (एम सी एन)
 
(‘मीडिया केयर नेटवर्क’ के डिस्पैच में प्रकाशित इस रचना का प्रकाशन ‘मीडिया केयर नेटवर्क’ के माध्यम से ‘दैनिक पंजाब केसरी’ व ‘हमारा महानगर’ सहित कई पत्र-पत्रिकाओं में हो चुका है).

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