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Monday, March 22, 2010

जीव-जंतुओं की अनोखी दुनिया-41




जीव-जंतुओं की अनोखी दुनिया
. योगेश कुमार गोयल (मीडिया केयर नेटवर्क)

घोंघा, जिसके पेट की नस में भरा होता है खतरनाक जहर घोंघे के बारे में तो आपने अपने स्कूली दिनों में अपनी पाठ्य पुस्तकों में अवश्य पढ़ा ही होगा लेकिन शायद आप नहीं जानते हों कि घोंघों की एक प्रजाति तो बहुत ही जहरीली होती है, जो अपने शिकार के शरीर में अपना खतरनाक जहर प्रविष्ट कराकर उसके दिल की धड़कन बंद कर देती है, जिससे कुछ ही पलों में शिकार मौत की नींद सो जाता है। हिन्द व प्रशांत महासागर के तटीय इलाकों में पाई जाने वाली घोंघों की यह प्रजाति हालांकि देखने में बहुत सुंदर और आकर्षक होती है लेकिन इसकी फितरत बहुत खतरनाक होती है। अपनी प्यारी बनावट और लुभावने व आकर्षक अंदाजों से जाने जाने वाले गैस्ट्रोपैड परिवार से संबंधित इन जहरीले घोंघों के पेट की नस में एक बहुत ही खतरनाक तरह का विष भरा होता है। इसी विष को ये घोंघे अपने शिकार के शरीर में एक बर्छी की तरह घुसा देते हैं। उस समय तो शिकार को बस यही अहसास होता है मानो उसके शरीर में कोई छोटी सी सुई चुभी हो किन्तु जहर के प्रभाव से कुछ ही पलों में उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है और वह अपनी सुध-बुध खो देता है, जिसके बाद उसका हृदय भी काम करना बंद कर देता है। सांप की तरह घुमावदार शारीरिक आकृति वाले इन घोंघों के शरीर का कोमल हिस्सा ढ़क्कन (खोल) के अंदर होता है। ये अपने मुंह को खोल से बाहर निकालकर बड़ी आसानी से चारों ओर घुमा सकते हैं। जब ये घोंघे शिकार की तलाश में निकलते हैं तो संवेदनशील अंगों वाला अपना मुंह अपने सख्त खोल से बाहर निकाल लेते हैं लेकिन खतरे का जरा भी आभास होते ही मुंह को फौरन खोल के अंदर कर लेते हैं। (एम सी एन)
मेंढ़क, जिनका इस्तेमाल होता है नशे की लत की पूर्ति के लिए
नशा करने के लिए लोग न जाने-जाने क्या-क्या जतन करते हैं, कैसे-कैसे अजीबोगरीब तरीके खोज निकालते हैं। कुछ ऐसा ही क्वींसलैंड में भी देखने को मिलता है, जहां लोग अपनी नशे की लत की पूर्ति करने के लिए एक विशेष प्रजाति के मेंढ़कों का इस्तेमाल करते हैं। जी नहीं, नशा करने के लिए ये लोग इन मेंढ़कों को अपना शिकार नहीं बनाते बल्कि ‘बूफो मारनिम’ नामक प्रजाति के इन मेंढ़कों को बगैर कोई नुकसान पहुंचाए इनसे अपनी नशे की लत की पूर्ति करते हैं और इसके लिए ये लोग इन मेंढ़कों को अपने घरों में पालते हैं। दरअसल ये मेंढ़क दिनभर में कई बार एक चिपचिपे से पदार्थ का स्राव करते हैं, जो बहुत नशीला होता है। इसी चिपचिपे पदार्थ को ये लोग कांच के किसी बर्तन में एकत्र करते रहते हैं और फिर नशा करने के लिए इसी पदार्थ का सेवन करते हैं। इस चिपचिपे पदार्थ को पीने से शराब से भी तेज नशा चढ़ता है। (एम सी एन)
‘आॅर्ब वीवर’ मकड़ी के जाले से बनता है मजबूत जाल
शायद आपको जानकर हैरानी हो कि किसी मकड़ी के जाले को कैसे कोई मछली पकड़ने के लिए एक मजबूत जाल के रूप में इस्तेमाल कर सकता है किन्तु ‘आॅर्ब वीवर’ नामक एक विशेष प्रजाति की मकड़ी पेड़ों के बीच इतना बड़ा और मजबूत जाला बुनती है, जिसका उपयोग मछुआरे वाकई मछली पकड़ने के लिए करते हैं। मछुआरे पेड़ों के बीच बुने आॅर्ब वीवर के इस जाले को उतार लेते हैं और फिर इस जाले की मदद से आराम से मछलियां पकड़ते हैं। पपुआ न्यू गिनी में पाई जाने वाली ये मकड़ियां पेड़ों के बीच करीब सात मीटर लंबा ऐसा मजबूत, वाटरप्रूफ और अत्यधिक तन्यता वाला जाला बुनती हैं, जिसके रेशमी धागों पर चिपचिपा पदार्थ होता है और इसी चिपचिपे पदार्थ के कारण यह जाला पानी में नहीं भीगता है। इस जाले की तन्यता भी बहुत ज्यादा होती है, जिसके कारण यह जाला बड़ी-बड़ी मछलियों का भार भी आसानी से झेल लेता है। (एम सी एन)

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