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Saturday, March 20, 2010



पुस्तक समीक्षा
सच में ‘अनोखी’ है
‘जीव-जंतुओं की अनोखी दुनिया’
. डा. प्रवीण खुराना

(पी.एच.डी.), वरिष्ठ पत्रकार, हरियाणा
सम्पादक: हरियाणा एजुकेशन न्यूज, ब्यूरो चीफ: इंडिया न्यूज हरियाणा

पेड़-पौधे और जीव-जंतु भी हमारे जीवन का एक ऐसा हिस्सा हैं, जिनके बिना सामाजिक परिवेश अधूरा सा है। यह बात अब लोगों को समझ में आने भी लगी है, शायद इसी कारण से टी. वी. व पत्र-पत्रिकाओं में जीवों के बारे में आने वाले कार्यक्रमों और लेखों को लोग रूचि लेकर देखते व पढ़ते हैं। जीवों की विचित्र दुनिया तो बच्चों व बड़ों के लिए सदा से कौतूहल भरी रही भी है। इसी कौतूहल और ज्ञान को बढ़ाने में बादली (झज्जर) निवासी जाने-माने युवा कलमकार एवं ‘मीडिया केयर नेटवर्क’, ‘मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स’ तथा ‘मीडिया केयर न्यूज’ के सम्पादक योगेश कुमार गोयल ने सच में एक अनोखी कृति की रचना की है, जिसका नाम भी उन्होंने ‘जीव-जंतुओं की अनोखी दुनिया’ ही रखा है।
हमारे समाज में यह तो प्रचलित रहा है कि सृष्टि में 84 लाख योनियों के बाद मानव जीवन मिलता है मगर जब हम योनियों की गिनती करते हैं तो ये पचास-सौ पर ही खत्म हो जाती हैं किन्तु जीवों की योनियों को ढूंढ़ें तो यह संख्या बहुत बड़ी हो जाती है और अनेक प्रकार के जीवों एवं उनके रहन-सहन की जानकारी मिलती है, जिसे जानने के बाद लोग दांतों तले उंगलियां दबाने को विवश हो जाते हैं। योगेश कुमार गोयल कृत इसी तरह की अनूठी पुस्तक ‘जीव-जंतुओं की अनोखी दुनिया’ में जीव-जंतुओं के जीवन के बारे में, उनके रहने और खाने के अलावा उनकी दिनचर्या सहित अन्य जानकारियां समाहित हैं।
लेखक ने अपनी बात पाठकों तक पहुंचाते हुए लिखा है कि पुस्तक में 134 जीवों के बारे में सचित्र जानकारियां दी गई हैं। यह सही है कि इस पुस्तक में संकलित किए गए जीव-जंतु अत्यंत दुर्लभ हैं और इनमें से अधिकांश की जानकारी तो इसी पुस्तक से ही मिलती है। जीवों और प्रकृति की चीजों को मानव अपने हितार्थ नष्ट करता रहा है, इस पर भी लेखक ने चिन्ता व्यक्त की है। शायद यही कारण है कि अब जीव दुर्लभ होते जा रहे हैं। यदि इस संदेश से भी हम नहीं चेते तो आज जो परिन्दे और जीव हमें दिखाई देते हैं, वे आने वाले समय में दुर्लभ हो जाएंगे।

हरियाणा साहित्य अकादमी के अनुदान से प्रकाशित इस पुस्तक के प्राक्कथन में अकादमी के निवर्तमान निदेशक देश निर्मोही ने सही लिखा है कि पाण्डुलिपि स्तरीय है। उनका कहना है कि इससे हर वर्ग के पाठक के ज्ञान में तो वृद्धि होगी ही, साथ ही बच्चों के लिए तो यह पुस्तक संग्रहणीय होगी। पुस्तक संग्रह करने लायक है भी।
वाकई इस पुस्तक में अनेक अद्भुत, असाधारण, दुर्लभ जीव-जंतुओं के बारे में बहुत दिलचस्प जानकारियां हैं। जैसे पुस्तक में ‘प्लैनेरियन’ नामक अद्भुत कीड़े की जानकारी है, जो न पूंछ काटने से मरता है और न ही मुंह काटने से। दुनिया के सबसे जहरीले बिच्छू ‘एड्रोक्टोमस आस्ट्रेलिस’ सहित अन्य जहरीले जीवों की जानकारी भी हैरान करने वाली है। दुनिया में अद्भुत पक्षियों में कौन पक्षी सबसे बड़ा है और किसका कितना वजन तथा कैसा आकार है, इनके अलावा पक्षी होते हुए भी कौन उड़ नहीं सकता, जैसी जानकारियां ज्ञान बढ़ाती हैं। मार्श हैरियर रंगदार छाया प्रदान करते हैं तो नर व मादा आस्ट्रिच, दोनों के अण्डे देने की जानकारी तो होश उड़ा देती है। आस्ट्रिच नाम के इस पक्षी के अलावा अन्य परिन्दों की रोचक जानकारी भी इस पुस्तक में है। सी-हाॅर्स नामक समुद्री जीव को ‘समुद्री घोड़ा’ ही कहा जाता है मगर वास्तव में वह मछली है, जो घोड़ेनुमा होती है। इसके अलावा अनेक प्रकार की मछलियों की जानकारी पाठकों को अपने साथ बांधे रहती है। अपने जीवन का हिस्सा हो चुके मुर्गे, बिल्ली, कोयल जैसे जीव भी यहां अपनी अनूठी जानकारियों के कारण अनोखे ही लगते हैं। कोई पक्षी संगीत भी बजा सकता है, यह सुनने में ही अजीब लगता है मगर कुक्कुट एक ऐसा पक्षी है, जो कुशल ड्रम वादक है। व्हेल सहित अन्य कई पक्षी संगीत का शौक रखते हैं।
जमीन पर रेंगने वाले कीड़ों के अलावा सांपों व अन्य जीवों के रहन-सहन, उनकी खूबियां, कौनसा जीव किसका शिकार करना पसंद करता है, उनकी प्रजनन क्षमता और किस जीव का कौनसा अंग महत्वपूर्ण होता है तथा कौनसा पक्ष कमजोर होता है, सहित अनेक दुर्लभ जानकारियां इस पुस्तक में समायी हैं। पुस्तक का आवरण भी अपने आप में अच्छा बन पड़ा है। जंगल के जीवों के चित्र अपनी ओर आकृष्ट करते हैं। इन सभी कारणों से यह पुस्तक सच में अनोखी और संग्रहणीय होने के साथ-साथ ज्ञानवृद्धि भी करती है।
पुस्तक: जीव-जंतुओं की अनोखी दुनिया
लेखक: योगेश कुमार गोयल
पृष्ठ संख्या: 96
मूल्य: 100 रुपये
संस्करण: 2009
प्रकाशक: मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स, बादली, जिला झज्जर (हरियाणा)-124105.
Mob : 9416740584.


पुस्तक की प्राप्ति अथवा इस पुस्तक के संबंध में किसी भी प्रकार की अन्य जानकारी के लिए कृपया पुस्तक के लेखक श्री योगेश कुमार गोयल से निम्न नंबरों पर सम्पर्क करें:-
9416740584, 9896036475.

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