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Saturday, March 20, 2010

तीखे तेवर




पुस्तक समीक्षा
सामाजिक अपघातों को बेनकाब करने का सार्थक प्रयास है योगेश कुमार गोयल की ‘तीखे तेवर’

पुस्तक: तीखे तेवर
लेखक: योगेश कुमार गोयल
पृष्ठ संख्या: 160
मूल्य: 150 रुपये
संस्करण: 2009 (सजिल्द)
प्रकाशक: मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स, मेन बाजार, बादली, जिला झज्जर (हरियाणा)-124105.


‘तीखे तेवर’ हरियाणा के प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री योगेश कुमार गोयल की एक महत्वपूर्ण साहित्यिक कृति है, जिसमें सामाजिक अपघातों के विरूद्ध न केवल जोरदार आवाज लेखक ने उठाई है अपितु ऐसा करने वालों को अपने लेखों के माध्यम से कठोर चेतावनी भी दी है। इस कृति में योगेश कुमार गोयल के कुल 25 आलेखों को संजोया गया है, जिनमें साम्प्रदायिक एवं जातीय प्रदूषण, न्याय व्यवस्था की कछुआ चाल और हास्यास्पद निर्णय, बोरवैलों में गिरकर होने वाली नवजातों की अकाल मृत्यु, सिसकते बचपन, बालश्रम, पुलिस का नंगा नाच, असुरक्षा और आतंक का फैलता सुरसा गात, शिक्षण संस्थानों में रैगिंग का दंश, पेय पदार्थों में घुली विष भरी मृत्यु, एड्स की संक्रामकता, धार्मिक अंधविश्वासों का फैलता जाल, ‘रियलिटी शो’ का क्रूर मजाक, शोर प्रदूषण, जल प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग का कालजयी आक्रमण, मौसम और जलवायु की अस्थिरता, जलाभाव का निरन्तर बढ़ता खतरा, जनसंख्या अनियंत्रण के उत्तरदायी कारक, मोबाइल प्रदूषण, पान मसालों में बिकता कैंसर, मद्यपानों का फैलता गरल, धूम्रपान के संक्रामक रोग, पीत पत्रकारिता की भरमार, प्रिंट मीडिया और इलैक्ट्राॅनिक मीडिया की दायित्वहीनता आदि-आदि सामाजिक अपघातों को लेखक ने बड़ी तटस्थता एवं ईमानदारी से अभिव्यक्ति दी है।
‘तीखे तेवर’ में संजोये गए आलेखों में समाज, परिवार, राष्ट्र और शासन की उदासीन भूमिका को भी दो टूक चित्रित किया गया है। इन आलेखों में लेखक के विशद चिंतन एवं अनुभव की गहराई का स्पष्ट बोध होता है। पुस्तक के आवरण पृष्ठ से ही लेखक के तीखे तेवरों का आभास बखूबी हो जाता है। ‘तीखे तेवर’ में वास्तव में लेखक के रचनात्मक तेवर देखते ही बनते हैं। आज के सामाजिक सरोकारों को ‘तीखे तेवर’ में बखूबी दर्शाया गया है और सामाजिक बुराईयों का सीधा पर्दाफाश किया गया है। इन आलेखों में लेखक का रचनात्मक कौशल लाजवाब है। ‘तीखे तेवर’ में संग्रहीत एक-एक आलेख अत्यंत महत्वपूर्ण है। काश! बुद्धिजीवी वर्ग इन आलेखों का संज्ञान ले ले तो न केवल भारत में अपितु विश्व भर में मानवता को भयमुक्त किया जा सकता है और समता, स्वतंत्रता, सह-अस्तित्व, भेदभाव रहित तथा पारस्परिक सौहार्द पर आधारित एवं ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना से ओत-प्रोत विश्व की संरचना करना सहज एवं सरल होगा।
‘तीखे तेवर’ की भूमिका एक प्रतिष्ठित हिन्दी दैनिक के सम्पादक डा. राधेश्याम शुक्ल ने लिखी है और उन्होंने बिल्कुल सही लिखा है कि लेखक योगेश कुमार गोयल की दृष्टि बहुत व्यापक है और इस पुस्तक में संकलित प्रत्येक आलेख निश्चय ही श्री गोयल को एक यशस्वी, जागरूक एवं समाज चेता पत्रकारों की श्रेणी में स्थान दिलाएंगे। डा. शुक्ल ने इस पुस्तक की भूमिका में लिखा है, ‘‘तीखे तेवर श्री गोयल के ऐसे सामाजिक सरोकार वाले लेखों का संग्रह है, जिसमें एक अत्यंत संवेदनशील लेखक की उत्तेजक और तनिक आक्रोशपूर्ण टिप्पणियां सामने आयी हैं। ये केवल पत्रकारिता के दायित्व से प्रेरित आलेख नहीं हैं बल्कि इसमें लेखक की पीड़ा, क्षोभ और सामाजिक विकृतियों के निराकरण की तीव्र आकांक्षा व्यक्त हुई है। ये आलेख पाठक को उद्वेलित ही नहीं करते, उसे कुछ सोचने और करने के लिए प्रेरित भी करते हैं।’’
निसंदेह, देश की तीन प्रतिष्ठित समाचार-फीचर एजेंसियों ‘मीडिया केयर नेटवर्क’, ‘मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स’ तथा ‘मीडिया केयर न्यूज’ के समूह सम्पादक श्री योगेश कुमार गोयल द्वारा लिखित पुस्तक ‘तीखे तेवर’ सामाजिक अपघातों को बेनकाब करने का एक सार्थक प्रयास है। यह एक शाश्वत एवं उपादेय कृति है, जिसको साहित्य एवं पत्रकारिता जगत में ही नहीं अपितु सामाजिक सरोकारों से जुड़े सभी सहृदयजनों में समादृत किया जाना चाहिए। लेखक को इस महत्वपूर्ण कृति के लिए बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।
- डा. महेश दिवाकर
डी. लिट् (हिन्दी)
अध्यक्ष, रीडर एवं शोध निर्देशक, स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग,
गुलाब सिंह हिन्दू महाविद्यालय, चांदपुर, बिजनौर (उ.प्र.)


पुस्तक की प्राप्ति अथवा इस पुस्तक के संबंध में किसी भी प्रकार की अन्य जानकारी के लिए कृपया पुस्तक के लेखक श्री योगेश कुमार गोयल से निम्न नंबरों पर सम्पर्क करें:-
9416740584, 9896036475.
email : mediacaregroup@gmail.com

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