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Wednesday, June 09, 2010

40 साल में अण्डे से व्यस्क बनते हैं ‘ज्यूल बीटल’

-- योगेश कुमार गोयल (मीडिया केयर नेटवर्क)

समूचे यूरोप के जंगलों में पाए जाने वाले ‘ज्यूल बीटल’ नामक कीट अत्यंत दुर्लभ कीट माने जाते हैं। इन कीटों की शारीरिक चमक बड़ी अनूठी होती है। इस कीट की सबसे बड़ी विलक्षणता यह है कि अण्डे से व्यस्क बीटल बनने में बहुत लंबा समय लगता है। इस प्रक्रिया में प्रायः 40 वर्ष तक का समय भी लग जाता है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस कीट का जीवनकाल कितना लंबा होता है। मादा बीटल किसी जीवित वृक्ष की छाल पर अपने अण्डे देती है और इन अण्डों से निकलने वाले लार्वे छाल के अंदर पेड़ में ही अपना भोजन तलाशते हैं। उस पेड़ को काटकर गिरा दिए जाने के बाद भी यह लार्वा उसी के भीतर रहकर अपना भोजन तब तक प्राप्त करते हैं, जब तक उन्हें प्राप्त होता रहे और एक पूर्ण विकसित बीटल के रूप में ही बाहर निकलते हैं। इस कीट को ‘स्पैंडर बीटल’ के नाम से भी जाना जाता है। आप यह भी जानना चाहेंगे कि इसे ‘ज्यूल बीटल’ क्यों कहा जाता है? इसका कारण यह है कि यूरोप के कटिबंधीय क्षेत्रों में इन बीटल्स को इनकी अनूठी चमक के कारण लोग अपने आभूषणों (ज्वैलरी) में भी जड़ते हैं, यही कारण है कि इन्हें ‘ज्यूल बीटल’ भी कहा जाने लगा। हालांकि यूरोप के कुछ देशों में इन्हें पकड़ने और मारने पर कानूनी प्रतिबंध लागू हैं। (एम सी एन)

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