आपकी उपयोगी रचनाओं एवं टिप्पणियों का स्वागत है.

उपयोगी सूचना

हिन्दी भाषा के समाचारपत्र तथा पत्रिकाएं यदि अपने प्रकाशनों के लिए ‘मीडिया केयर नेटवर्क’, ‘मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स’ तथा ‘मीडिया केयर न्यूज’ की सेवाएं नियमित प्राप्त करना चाहें तो हमसे ई-मेल द्वारा सम्पर्क करें। आपके अनुरोध पर सेवा शुल्क संबंधी तथा अन्य अपेक्षित जानकारियां उपलब्ध करा दी जाएंगी।

हम इन फीचर एजेंसियों के डिस्पैच में निम्नलिखित विषयों पर रचनाएं प्रसारित करते हैं तथा डिस्पैच कोरियर अथवा ई-मेल द्वारा उपलब्ध कराए जाते हैं:-

राजनीतिक लेख, रिपोर्ट एवं विश्लेषणात्मक टिप्पणी, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय चर्चा, सामयिक लेख, फिल्म लेख एवं स्टार इंटरव्यू, फिल्म गॉसिप, ज्ञानवर्द्धक एवं मनोरंजक लेख, रहस्य-रोमांच, घर परिवार, स्वास्थ्य, महिला जगत, युवा जगत, व्यंग्य, कथा-कहानी, मनोरंजन, कैरियर , खेल, हैल्थ अपडेट, खोज खबर, महत्वपूर्ण दिवस, त्यौहारों अथवा अवसरों पर लेख, बाल कहानी, बाल उपयोगी रचनाएं, रोचक जानकारियां इत्यादि।

लेखक तथा पत्रकार विभिन्न विषयों पर अपनी उपयोगी अप्रकाशित रचनाएं प्रकाशनार्थ ई-मेल द्वारा भेज सकते हैं।
Share/Bookmark

अभी तक यहां आए पाठक

Monday, May 10, 2010

जीव-जंतुओं की अनोखी दुनिया-48-1

- योगेश कुमार गोयल (मीडिया केयर नेटवर्क)

स्तनधारी होने पर भी अण्डे देता है ‘एकिड्ना’

‘एकिड्ना’ साही जैसा एक कांटेदार प्राणी है लेकिन इसके कांटेदार शरीर के अलावा भी इसकी एक और बड़ी विशेषता यह है कि यह दुनियाभर में पाए जाने तमाम स्तनपायी प्रजाति के जीवों में से उन दो प्रजाति के जीवों में शामिल है, जो स्तनपायी होने के बावजूद अण्डे देते हैं। अण्डे देने वाले ये दोनों स्तनपायी जीव आस्ट्रेलिया के न्यू गिनी क्षेत्र में ही पाए जाते हैं। अण्डे देने वाले ये दोनों स्तनपायी जीव हैं:- प्लैटीपस तथा एकिड्ना। मादा एकिड्ना सालभर में सिर्फ एक ही अंडा देती है। यह अंडा उसके पेट पर बनी थैली में रहता है। जब नर और मादा एकिड्ना का शारीरिक मिलन होता है, उसी समय यह थैली मादा एकिड्ना के पेट पर बन जाती है और शिशु कई हफ्तों तक इसी थैली में रहकर थैली में बनी ग्रंथियों से रिसने वाला दूध पीकर बड़ा होता है। एक व्यस्क एकिड्ना की लम्बाई करीब एक फुट तक होती है जबकि उसका वजन 4 से 10 किलो के बीच होता है। चूंकि एकिड्ना का शरीर भी साही की ही भांति नुकीले कांटों से भरा होता है और यह अपनी लंबी तथा चिपचिपी जीभ से कीड़े-मकौड़े पकड़-पकड़कर खाता है, इसीलिए इसे ‘कंटीला कीटभक्षी’ भी कहा जाता है। (एम सी एन)

No comments:

समय बहुमूल्य है, अतः एक-एक पल का सदुपयोग सार्थक कार्यों में करें.