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Tuesday, May 25, 2010

हैल्थ अपडेट : मानसिक क्षमता नहीं बढ़ने देता कैलकुलेटर

प्रस्तुति: योगेश कुमार गोयल (मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स)

आज छोटी-छोटी गणनाओं के लिए भी कैलकुलेटर का उपयोग आम बात हो गई है लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि गणित के कठिन सवालों के हल के लिए कैलकुलेटर के बढ़ते उपयोग से मानसिक क्षमता का विकास नहीं हो पाता। इसके विपरीत यदि गणित के हल मानसिक तौर पर तैयार किए जाएं तो मानसिक क्षमता के साथ ही गणितीय कौशल भी बढ़ता है। यूनिवर्सिटी ऑफ सैसकेटचेवन के वैज्ञानिकों के एक दल ने अध्ययन करके पाया कि कैलकुलेटरों का उपयोग करने तथा न करने वाले छात्रों के गणितीय कौशल में काफी अंतर है। चीन के कैलकुलेटर का उपयोग न करने वाले छात्रों की सवाल हल करने की मानसिक क्षमता कनाडियाई छात्रों से ज्यादा पाई गई। गौरतलब है कि चीन में प्राथमिक व माध्यमिक स्तर पर कैलकुलेटर का उपयोग नहीं होता जबकि कनाडा में हर छात्र के पास अपना कैलकुलेटर होता है।

यह अध्ययन करने वाले मनोवैज्ञानिक डा. जैमी कैंपबेल के अनुसार चीनी व कनाडियाई छात्रों ने हालांकि पूछे गए सवालों के सही जवाब दिए थे किन्तु चीनी छात्रों की प्रश्नों के उत्तर देने की गति काफी तेज थी। यह अध्ययन चीन तथा कनाडा में शिक्षा ग्रहण करने वाले चीनी छात्रों और श्वेत कनाडियाई छात्रों पर किया गया था। बिना कैलकुलेटर के आसान सवाल हल करने में श्वेत कनाडियाई छात्रों ने 1.1 सैकेंड का समय लिया जबकि चीन में पढ़ रहे चीनी छात्रों तथा कनाडा में पढ़ रहे चीनी छात्रों ने 0.9 सैकेंड में सवाल हल कर लिया। जब इन छात्रों को जटिल सवाल हल करने के लिए दिए गए तो चीन में शिक्षा ग्रहण करने वाले चीनी छात्रों ने श्वेत छात्रों से 50 प्रतिशत व कनाडा में शिक्षारत चीनी छात्रों से 33 प्रतिशत ज्यादा सवाल हल किए। निष्कर्षतः वैज्ञानिकों का कहना है कि जो छात्र कैलकुलेटरों का उपयोग बहुत कम करते हैं, उनकी बौद्धिक क्षमता बहुत विकसित होती है जबकि कैलकुलेटर का उपयोग करने वाले छात्रों की क्षमता का दोहन नहीं हो पाता। (मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स)

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