योगेश कुमार गोयल

वरिष्ठ पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक एवं स्तंभकार
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Tuesday, May 25, 2010

खोज खबर: डिजिटल पैन से होगा इलैक्ट्रॉनिक लेखन

प्रस्तुति: योगेश कुमार गोयल (मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स)

कम्प्यूटर उद्योग का पिछले काफी समय से यही प्रमुख लक्ष्य रहा है कि हाथ से लिखे शब्दों को पढ़ने में समर्थ कोई विश्वसनीय सॉफ्टवेयर विकसित किया जा सके। यह नई तकनीक हालांकि हमारे अपठनीय घसीट लेखन को भी डिजिटल दुनिया की मुख्यधारा में ले आएगी लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि कम्प्यूटरों के ‘की बोर्ड’ की उपयोगिता ही समाप्त हो जाएगी। जहां तक लिखने का सवाल है, कलम और कागज को न तो कोई भी उपकरण अब तक मात दे सका है और न ही दे सकता है।

हस्तलिखित सामग्री को डिजिटल डाटा के कम्प्यूटर नहीं बदल पाए लेकिन अब नया सॉफ्टवेयर, बेहतर हार्डवेयर और हाथ में पकड़े जा सकने वाले उपकरणों की सफलता ने कम्प्यूटर निर्माण करने वाली कम्पनियों को ‘इलैक्ट्रॉनिक लेखन’ पर पुनर्विचार करने को विवश कर दिया है। इस तरह की खोजों को ‘डिजिटल इंक’ के रूप में जाना जाता है। इनमें सबसे अच्छी मशीन आई बी एम की ‘थिंक पैड ट्रांसनोट’ है। हालांकि ट्रांसनोट हस्तलेखन को पढ़ने की कोशिश नहीं करता और न ही उसे कम्प्यूटर में दर्ज करता है लेकिन यह आपकी आड़ी-तिरछी लिखावट की तस्वीर खींच लेता है, जिसे कम्प्यूटर में सुरक्षित रखा जा सकता है और उसमें फेरबदल भी किया जा सकता है।

600 मैगा हटर््ज के ‘पेंटियम 3’ प्रोसेसर के साथ लगा ट्रांसनोट असाधारण सा नजर आता है। यह लैपटॉप और इलैक्ट्रॉनिक लीगल पैड का मिश्रण सा लगता है। ए-4 पेपर के आकार का पैड पैनल में जुड़ा होता है, जिसका कनैक्शन की बोर्ड और डिस्प्ले स्क्रीन से है। विशेष रूप से बनाए गए डिजिटल बॉल पैन और पैड में लगे सेंसर आपके शब्दों व रेखाचित्रों को दर्ज कर लेते हैं, जिन्हें बाद में आप कम्प्यूटर मे फीड कर सकते हैं या ई मेल भी कर सकते हैं। (मीडिया एंटरटेनमेंट फीचर्स)

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